सिंगूर: साल 2011 में जिस सिंगूर ने ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह तैयार की थी, 2026 के विधानसभा चुनाव में उसी सिंगूर ने तृणमूल कांग्रेस को नकार दिया है। सिंगूर से टीएमसी के कद्दावर नेता और मंत्री बेचाराम मन्ना की हार और राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के संकेतों के बीच अब यहाँ 'उद्योग' की चर्चा फिर से तेज हो गई है। सिंगूर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे रवींद्रनाथ भट्टाचार्य, जिन्हें इलाके में लोग 'मास्टरमशाइ' के नाम से जानते हैं, उन्होंने इस बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
सिंगूर में फिर लगेंगी फैक्ट्रियां?
कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे और अब बीजेपी का हिस्सा रवींद्रनाथ भट्टाचार्य का मानना है कि राज्य में बीजेपी के आने से सिंगूर का 'औद्योगिक भाग्य' फिर से संवर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार के तहत सिंगूर की उस विवादित जमीन पर, जो फिलहाल बंजर पड़ी है, अब खेती और उद्योग का बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा। मास्टरमशाइ ने कहा, "बीजेपी की जीत से सिंगूर सहित पूरे बंगाल में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं पैदा होंगी।"
बीजेपी को 'मास्टरमशाइ' की खरी-खरी
बढ़ती उम्र के कारण घर पर ही समय बिता रहे रवींद्रनाथ भट्टाचार्य ने नई सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता का अहंकार ही तृणमूल के पतन का कारण बना है। उन्होंने बीजेपी को नसीहत दी कि अगर वे भी सीपीएम की तरह 'अत्याचार' और टीएमसी की तरह 'भ्रष्टाचार' के रास्ते पर चले, तो जनता उन्हें भी माफ नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नई सरकार को पारदर्शी रहना होगा, वरना उनका हाल भी पूर्ववर्ती सरकारों जैसा ही होगा।गौरतलब है कि 2006 में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद से सिंगूर की जमीन न तो पूरी तरह खेती के काम आ सकी और न ही वहां उद्योग लग पाया। अब बीजेपी की जीत के बाद स्थानीय लोगों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या सच में यहाँ उद्योगों की वापसी होगी।