मध्यमग्राम/सिलीगुड़ी:बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। पुलिस का मानना है कि यह हत्या किसी तात्कालिक गुस्से का नतीजा नहीं, बल्कि हफ्तों की 'कोल्ड ब्लडेड प्लानिंग' थी। अब इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
फर्जी नंबर प्लेट और असली मालिक का रहस्य
बुधवार रात मध्यमग्राम के दोहारिया में जिस कार ने चंद्रनाथ की गाड़ी को रोककर फायरिंग की थी, उस गाड़ी की नंबर प्लेट पुलिस जांच में फर्जी निकली है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह नंबर सिलीगुड़ी RTO में रजिस्टर्ड है। जब पुलिस ने सिलीगुड़ी के माटीगाड़ा निवासी और चाय उद्योग से जुड़े विलियम जोसेफ से पूछताछ की, तो मामला और उलझ गया। विलियम ने पुलिस को बताया कि उनकी गाड़ी (जिसका नंबर इस्तेमाल हुआ) उनके पास सिलीगुड़ी में ही सुरक्षित है। उन्होंने अपनी गाड़ी बेचने के लिए इंटरनेट पर विज्ञापन दिया था, जिसका फायदा उठाकर हत्यारों ने जानकारी जुटाई हो सकती है।
सबूत मिटाने की शातिर कोशिश
जांच में यह भी सामने आया है कि हत्यारों ने वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी का चेसिस नंबर (Chassis Number) घिसकर मिटा दिया था, ताकि गाड़ी की पहचान न हो सके। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हत्यारों ने न केवल गाड़ी का मॉडल बल्कि नंबर प्लेट भी इतनी सफाई से कॉपी की थी कि पहली नजर में धोखा हो जाए।
वारदात का खौफनाक मंजर
बुधवार रात करीब 10:15 बजे, जब चंद्रनाथ रथ गाड़ी से जा रहे थे, तब एक कार ने अचानक पीछे से आकर उनकी गाड़ी के सामने आड़ा-तिरछा ब्रेक लगाया और रास्ता रोक लिया। इससे पहले कि चंद्रनाथ कुछ समझ पाते, हमलावरों ने उन्हें गोलियों से भून दिया।
SIT की जांच तेज
पुलिस अब इस एंगल से जांच कर रही है कि हमलावरों को चंद्रनाथ के पल-पल के मूवमेंट की खबर कैसे थी। फर्जी नंबर प्लेट और चेसिस नंबर मिटाने की तकनीक बताती है कि इसमें पेशेवर अपराधियों का हाथ है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और डंप डेटा के जरिए हत्यारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।