कोलकाता: चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुए हादसे के बाद घायलों के इलाज को लेकर पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है। घायलों को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के फैसले पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी जान बचाना था।
घायलों को निजी अस्पताल भेजने के फैसले पर क्या बोले मुख्यमंत्री?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वास्थ्य भवन के कंट्रोल रूम में अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि चोरबागान हादसे के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता घायलों को जल्द से जल्द बेहतर इलाज उपलब्ध कराना था। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला मौके पर लिया गया।
सरकारी अस्पतालों की कमियों पर मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर बात करते हुए स्वीकार किया कि स्वास्थ्य ढांचे में कुछ कमियां हैं। हालांकि, उन्होंने इसे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं को निजी अस्पतालों के बराबर लाने में अभी समय लगेगा। उनके मुताबिक, इस दिशा में सुधार के लिए करीब दो साल की जरूरत हो सकती है।
निजी अस्पताल में इलाज के दौरान किसी घायल की मौत नहीं हुई: CM
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हादसे में घायल 25 लोगों को बेहतर इलाज देने के प्रयास किए गए और उपचार शुरू होने के बाद इनमें से किसी की मौत नहीं हुई। उनके बयान के मुताबिक, मरीजों को निजी अस्पताल भेजने का मकसद हादसे में हुई जनहानि के बाद स्थिति को और गंभीर होने से रोकना था। यह मुख्यमंत्री का दावा है, जिसे अस्पताल के स्वतंत्र चिकित्सा रिकॉर्ड के साथ अलग से सत्यापित नहीं किया गया है।
निजी अस्पताल के इलाज का खर्च कौन उठाएगा?
घायलों को निजी अस्पताल भेजे जाने के बाद इलाज के खर्च को लेकर भी सवाल उठे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि संबंधित अस्पताल ने इलाज के लिए तत्काल भुगतान की मांग नहीं की थी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अस्पताल से आयुष्मान भारत योजना की दरों के अनुसार बिल भेजने को कहा है। इस तरह सरकार ने इलाज के खर्च को व्यवस्थित करने की बात कही।
मीडिया से बात करने वाले डॉक्टरों पर भी मांगी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री ने सरकारी मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों के मीडिया में दिए गए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव से यह जानकारी जुटाने को कहा कि संबंधित डॉक्टर बयान देते समय ड्यूटी पर थे या नहीं। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि कोई डॉक्टर ड्यूटी के समय अपनी जिम्मेदारी छोड़कर बाहर गया था, तो मामले को सेवा नियमों के अनुसार देखा जाना चाहिए।
चोरबागान हादसे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ी चर्चा
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत और करीब 25 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी। इस घटना के बाद भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल उठे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि सरकार ने घायलों को बेहतर उपचार दिलाने के उद्देश्य से निजी अस्पताल भेजने का फैसला किया था।