कांथी: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद,शुभेंदु अधिकारी जब पहली बार अपने घर 'कांथी' लौटे, तो नजारा किसी बड़े उत्सव जैसा था। 'शांतिकुंज' (शुभेंदु अधिकारी का निवास) के बाहर शाम से ही लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था, जो आधी रात बीत जाने के बाद भी कम नहीं हुआ।
रात 2 बजे भी गूंजे 'जय श्री राम' के नारे
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कोलकाता में दिन भर के कार्यक्रमों और कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद रात करीब 10 बजे कांथी के लिए रवाना हुए। जब उनका काफिला रात 2 बजे कांथी पहुँचा, तो सड़क पर तिल रखने की जगह नहीं थी। समर्थकों ने फूलों, मालाओं और 'जय श्री राम' के नारों के साथ अपने नए मुख्यमंत्री का स्वागत किया। भीड़ इतनी अधिक थी कि शुभेंदु को अपनी गाड़ी का दरवाजा खोलकर खड़ा होना पड़ा। जनता का प्यार देखकर मुख्यमंत्री भी भावुक नजर आए। उन्होंने हाथ जोड़कर सबका आभार व्यक्त किया और विनम्रता से कहा, "काफी रात हो चुकी है, अब आप सब घर जाकर आराम करें।"
माता-पिता ने उतारी आरती, दोस्तों ने याद किया 'बुबाई' का जुनून
घर पहुँचते ही शुभেন্দু ने पिता शिश अधिकारी और मां गायत्री अधिकारी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उम्र के इस पड़ाव पर भी बेटे की बड़ी सफलता ने माता-पिता की थकान मिटा दी थी। वहीं, उनके बचपन के दोस्तों का कहना है कि 'बुबाई' (शुभेंदु का उपनाम) बचपन से ही बेहद जिद्दी और धुन के पक्के रहे हैं। जो लक्ष्य उन्होंने तय किया, उसे हासिल करके ही दम लिया और आज उसी जिद ने उन्हें राज्य के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचाया है।