कोलकाता: भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 4 घंटे तक रुकने के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता शुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया है कि ममता बनर्जी वहां कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं ले पाईं, क्योंकि उनके एजेंट ने मुख्यमंत्री की 'घेराबंदी' कर रखी थी।
'कड़ी निगरानी में थीं ममता' - शुभेंदु अधिकारी
शुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और पूरे पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को आश्वस्त करते हुए कहा, "भवानीपुर की टीएमसी उम्मीदवार को किसी भी तरह की अतिरिक्त सुविधा लेने से रोक दिया गया। वह चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, कोई भी नियम विरुद्ध काम नहीं कर पाईं। जब तक वह स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में थीं, मेरे चुनावी एजेंट **एडवोकेट सूर्यनील दास वहां मौजूद थे और उन्होंने मुख्यमंत्री पर कड़ी निगरानी रखी।"
बीजेपी का दावा: 'असत' उपाय करने से रोका
शुभेंदु ने आगे आरोप लगाया कि सूर्यनील दास ने ममता बनर्जी को कड़े पहरे में रखा ताकि वह किसी भी 'असत' (गलत) तरीके का सहारा न ले सकें। भाजपा का कहना है कि वे ईवीएम की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी अवैध गतिविधि को सफल नहीं होने देंगे।
ममता का पलटवार: 'वोट की रक्षा के लिए आई थी'
वहीं, स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकलने के बाद ममता बनर्जी ने भाजपा के दावों के विपरीत पुलिस और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, "मुझे 6-7 शिकायतें मिली थीं, इसलिए मैं यहां आई थी। पुलिस अपना काम ठीक से नहीं कर रही है, वे चुनाव आयोग के हाथ की कठपुतली बन गए हैं। मेरा काम लोगों के दिए हुए वोट की रक्षा करना है।"
क्या हुआ था शाखावत मेमोरियल में?
गुरुवार शाम से आधी रात तक शाखावत मेमोरियल स्कूल के बाहर भारी तनाव रहा। ममता बनर्जी अंदर मौजूद थीं, जबकि बाहर टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच जमकर नारेबाजी हुई। शुभेंदु अधिकारी के इस नए खुलासे ने मतगणना से पहले बंगाल की राजनीतिक लड़ाई को और अधिक व्यक्तिगत और तीखा बना दिया है।