कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के भीतर बयानबाजी का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। हुगली से सांसद रचना बनर्जी के एक इंटरव्यू में दिए गए बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने उन पर तीखा हमला बोला। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को फिर सुर्खियों में ला दिया।
'मेरी लोकप्रियता से जीती हुगली' - रचना का दावा
एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में रचना बनर्जी ने कहा कि पार्टी का चेहरा भले ही ममता बनर्जी हों, लेकिन हुगली जीतने के लिए पार्टी को एक सेलिब्रिटी चेहरे की जरूरत थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी लोकप्रियता और पहचान की वजह से तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली। साथ ही उन्होंने साफ किया कि वह सांसद पद से इस्तीफा नहीं देंगी।
रचना पर कल्याण का पलटवार
रचना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें हुगली की सही जानकारी तक नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'दीदी नंबर-1' की लोकप्रियता ने उन्हें पहचान जरूर दिलाई, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चुनाव केवल उनके दम पर जीता गया। उन्होंने यह भी कहा कि अब रचना को समझना चाहिए कि पार्टी के साथ कैसे चलना होता है।
ऋतब्रत और अन्य नेताओं पर भी साधा निशाना
कल्याण बनर्जी ने ऋतब्रत बंद्योपाध्याय सहित कई नेताओं पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग अलग मंच बनाकर राजनीति कर रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे नेताओं ने गलत तरीके से लाभ उठाया और अब अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री के फैसले का समर्थन
सभा के दौरान कल्याण बनर्जी ने मुख्यमंत्री द्वारा भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने गलत तरीके से संपत्ति बनाई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और जरूरत पड़े तो गिरफ्तारी भी होनी चाहिए।
फिरहाद हाकिम पर भी इशारों में हमला
बिना नाम लिए कल्याण बनर्जी ने कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हाकिम पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "सिर्फ स्याही को पकड़ने से काम नहीं चलेगा, कलम और दवात को भी पकड़ना होगा।" इसके साथ ही उन्होंने स्वाती खंदकार, मिताली बाग और स्नेहाशीष चक्रवर्ती समेत कई नेताओं पर भी सवाल उठाए।
TMC की अंदरूनी कलह फिर आई सामने
रचना बनर्जी और कल्याण बनर्जी के बयानों ने यह संकेत दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद अभी भी खत्म नहीं हुए हैं। एक ओर रचना अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता को जीत का आधार बता रही हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता इसे संगठन की ताकत बताते हुए उनके दावों को चुनौती दे रहे हैं।