कोलकाता / नबन्ना: तारातला में बहुमंजिला इमारत हादसे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार के नगर विकास विभाग ने राज्य में अवैध और त्रुटिपूर्ण निर्माणों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला किया है। सोमवार को नबन्ना में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने घोषणा की कि 31 मार्च 2026 तक अवैध या खामियों वाले निर्माण के मामलों में मकान मालिकों को आवश्यक सुधार करने का मौका दिया जाएगा।
1 अप्रैल 2027 से सख्त कार्रवाई, नक्शों का होगा री-इवैल्यूएशन
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 अप्रैल 2027 से नियमों के उल्लंघन पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। आगामी 1 अप्रैल के बाद से सभी निर्माण नक्शों (बिल्डिंग प्लान) का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। यदि कहीं भी अवैध निर्माण पाया जाता है, तो उसे ढहा दिया जाएगा या भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
कमजोर नींव पर पांच मंजिला इमारत को मंजूरी नहीं
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने साफ किया कि दो या तीन मंजिला इमारत की नींव (फाउंडेशन) पर पांच मंजिला निर्माण किसी भी स्थिति में मंजूर नहीं होगा। इसके अलावा तालाबों को पाटने (पोंड फिलिंग), सॉयल टेस्ट (मिट्टी की जांच) और निर्माण के तकनीकी मानकों की कड़ाई से जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि कोलकाता की मिट्टी तुलनात्मक रूप से नरम है, इसलिए बिना वैज्ञानिक योजना के बहुमंजिला इमारतों का निर्माण भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकता है।
थर्ड पार्टी एजेंसी की क्लीयरेंस अनिवार्य, बिल्डर्स उठाएंगे खर्च
निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एम्पैनल्ड थर्ड पार्टी एजेंसियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। भविष्य में इस निष्पक्ष विशेषज्ञ संस्था की क्लीयरेंस के बिना बिल्डिंग प्लान को मंजूरी नहीं मिलेगी। इन विशेषज्ञ एजेंसियों का पूरा खर्च डेवलपर्स और बिल्डर्स को उठाना होगा। ये संस्थाएं निर्माण के विभिन्न चरणों में जाकर गुणवत्ता की जांच करेंगी और उनकी रिपोर्ट के बिना काम आगे नहीं बढ़ेगा।
कमर्शियल इमारतों में पार्किंग लॉट अनिवार्य
व्यावसायिक भवनों (कमर्शियल बिल्डिंग्स) के लिए पार्किंग लॉट अनिवार्य कर दिया गया है। जिस तरह फायर क्लीयरेंस न मिलने पर प्लान आगे नहीं बढ़ता, उसी तरह पार्किंग लॉट की व्यवस्था न होने पर कमर्शियल बिल्डिंग का काम रोक दिया जाएगा।
जांच में KMC की लापरवाही उजागर, बीम में लगे थे नट-बोल्ट
तारातला इमारत हादसे की जांच का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि जांच में कोलकाता नगर निगम (KMC) की लापरवाही के प्रमाण मिले हैं। जिन अधिकारियों पर निगरानी की जिम्मेदारी थी, उन्होंने अपना कर्तव्य सही तरीके से नहीं निभाया। जांच में यह भी सामने आया है कि भवन के बड़े-बड़े बीम को नट-बोल्ट से जोड़ा गया था, जिससे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।मंत्री ने तृणमूल शासनकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले इमारतों पर समुचित निगरानी नहीं रखी गई, जिसे सुधारने के लिए अब यह व्यवस्था लागू की जा रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य तारातला जैसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना और जवाबदेही तय करना है।