कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के मौजूदा सत्र में मुख्यमंत्री ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक को हैरान कर दिया है। अब राज्य के मंत्रियों के लिए विधायकों की क्षेत्रीय शिकायतों को नजरअंदाज करना नामुमकिन होगा। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में स्पष्ट कर दिया है कि विधायकों द्वारा उठाए गए हर मुद्दे का एक तय समय सीमा के भीतर न केवल जवाब देना होगा, बल्कि समाधान का रोडमैप भी तैयार करना होगा।
मंत्रियों के लिए 'डेडलाइन' का नियम
मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद सरकारी तंत्र में हड़कंप मच गया है। अब से विधानसभा में विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की जो समस्याएं रखेंगे, उस पर संबंधित विभाग के मंत्री को महज एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब देना होगा। इतना ही नहीं, मंत्रियों को केवल खानापूर्ति के लिए 'कार्रवाई जारी है' जैसे जवाब देने की अनुमति नहीं होगी; उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि समस्या का समाधान कब तक सुनिश्चित किया जाएगा।
'लालफीताशाही' पर लगाम, सीएमओ रखेगा नजर
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने इसे सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधीन कर दिया है। हर रिपोर्ट की एक प्रति CMO को अनिवार्य रूप से भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री स्वयं इन आवेदनों की समीक्षा करेंगे और तीन महीने के भीतर सरकार का अंतिम निर्णय संबंधित विधायक तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाएगा। इस व्यवस्था से फाइलें अब दफ्तरों की धूल नहीं फांकेंगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी।
विपक्ष भी हुआ मुरीद: फिरहाद हाकिम ने कहा 'ऐतिहासिक'
सदन में इस घोषणा के बाद एक दुर्लभ दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत न केवल सत्ता पक्ष के विधायकों ने किया, बल्कि विपक्षी खेमे से भी समर्थन मिला। पूर्व मंत्री और विपक्षी विधायक फिरहाद हाकिम ने मेज थपथपाकर इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, "पिछले 15 वर्षों में ऐसा साहसी और जनहितैषी निर्णय विधानसभा में कभी नहीं देखा गया। यह वास्तव में एक ऐतिहासिक कदम है।"
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल जनप्रतिनिधियों का कद बढ़ाएगा, बल्कि इससे प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही भी तय होगी। लंबे समय से चली आ रही 'लालफीताशाही' की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री का यह 'टाइम-बाउंड' मॉडल राज्य के विकास की गति को नई दिशा देगा। जनता का भी मानना है कि जब विधायकों की सुनी जाएगी, तो सीधे तौर पर आम लोगों की समस्याओं का समाधान भी जल्दी होगा।