संसद के मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गया। राज्यसभा में विपक्ष ने NEET पेपर लीक, कथित अनियमितताओं और अन्य मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही छह बार स्थगित करनी पड़ी। लगातार व्यवधान के बाद कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
हंगामे के साथ शुरू हुआ मानसून सत्र
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और पूरे दिन सदन सामान्य रूप से नहीं चल सका।
NEET पेपर लीक का मुद्दा लेकर विपक्ष का सरकार पर हमला
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सबसे पहले NEET परीक्षा और कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। खड़गे ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और मामले पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। विपक्षी दलों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
छह बार स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही
हंगामे के कारण सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सबसे पहले कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। इसके बाद 12:30 बजे, 12:50 बजे, दोपहर 2 बजे और फिर 2:30 बजे तक कार्यवाही टाली गई। लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहने के कारण अंततः राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई। लगातार छह बार कार्यवाही स्थगित होने से पहले दिन कोई महत्वपूर्ण विधायी कार्य नहीं हो सका।
सभापति ने सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की
सत्र की शुरुआत में सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने नव-निर्वाचित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्यसभा की पहचान हमेशा गंभीर और सार्थक चर्चा के लिए रही है। उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि संसद जनता की आकांक्षाओं का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और उपलब्ध समय का उपयोग जनहित से जुड़े विषयों पर होना चाहिए, न कि लगातार व्यवधानों में।
19 बैठकों वाला महत्वपूर्ण सत्र
सभापति ने जानकारी दी कि मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा की कुल 19 बैठकें निर्धारित हैं। इन बैठकों में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है कि सदन का समय सार्थक बहस और कानून निर्माण में लगाया जाए।
राज्यसभा में शुरू हुई AI आधारित अनुवाद सुविधा
इस सत्र की एक बड़ी विशेषता राज्यसभा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तात्कालिक अनुवाद प्रणाली की शुरुआत रही। राज्यसभा सचिवालय ने पहली बार यह सुविधा लागू की है, जिसके माध्यम से सांसद अपनी सीट पर लगे मल्टीमीडिया उपकरणों से विभिन्न भाषाओं में तत्काल अनुवाद सुन सकेंगे। फिलहाल यह सुविधा नौ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है। भविष्य में इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं तक विस्तारित करने की योजना है। सभापति ने सदस्यों से इस नई व्यवस्था पर सुझाव भी मांगे, ताकि इसे और प्रभावी बनाया जा सके।
पहले दिन ही दिखा टकराव का असर
मानसून सत्र के पहले दिन ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्ष जहां NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम रहा, वहीं सरकार सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील करती रही। लगातार हंगामे के कारण पहले दिन कोई ठोस विधायी कामकाज नहीं हो सका। आने वाले दिनों में भी कई अहम राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने के संकेत मिल रहे हैं।