MP Guru Purnima News 2026: मध्यप्रदेश सरकार इस बार गुरु पूर्णिमा को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य संस्कृति के महापर्व के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जिन सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण अभी बाकी है, उन्हें गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) से पहले पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि महर्षि सांदीपनि के जीवन, गुरुकुल शिक्षा प्रणाली और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित 10 से 20 पृष्ठों की एक लघु पुस्तिका प्रकाशित कर सभी विद्यालयों में वितरित की जाए, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और शिक्षा की प्राचीन विरासत से परिचित हो सके।
गुरु पूर्णिमा पर सरकार का बड़ा फोकस, पूरे प्रदेश में होंगे विशेष आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो ज्ञान, संस्कार और गुरु के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरु ही अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं, इसलिए इस पर्व को पूरे प्रदेश में गरिमा और जनभागीदारी के साथ मनाया जाना चाहिए। सरकार ने इस बार गुरु पूर्णिमा को 'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसमें स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, जनजातीय कार्य विभाग के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों और कला-संस्कृति से जुड़े संस्थानों की भी भागीदारी होगी।
गुरु पूर्णिमा से पहले होंगे सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में जिन सांदीपनि विद्यालयों का उद्घाटन अभी शेष है, उन्हें 29 जुलाई से पहले पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि महर्षि सांदीपनि केवल भगवान श्रीकृष्ण के गुरु ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था को संगठित स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी शिक्षा में अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं था और राष्ट्र निर्माण की भावना प्रमुख थी।
महर्षि सांदीपनि पर प्रकाशित होगी विशेष पुस्तिका
नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए सरकार एक विशेष पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि महर्षि सांदीपनि के जीवन, उनके योगदान और गुरुकुल शिक्षा पद्धति पर आधारित 10 से 20 पृष्ठों की लघु पुस्तिका तैयार कर प्रदेश के सभी विद्यालयों में वितरित की जाए। इस पुस्तिका के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय शिक्षा प्रणाली के मूल सिद्धांतों और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता से परिचित कराया जाएगा।
सभी स्कूल-कॉलेजों में होगा गुरु पूजन
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रतिष्ठित लोगों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा पर क्या-क्या होंगे कार्यक्रम?
| कार्यक्रम | विवरण |
|---|---|
| सरस्वती वंदना | मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण |
| गुरु सम्मान | शिक्षकों का स्वागत एवं सम्मान |
| छात्र-शिक्षक संवाद | प्रेरणादायक चर्चा |
| व्याख्यान | भारतीय ज्ञान परंपरा पर संबोधन |
| सांस्कृतिक कार्यक्रम | विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुतियां |
| साहित्यिक प्रतियोगिताएं | निबंध, भाषण, कविता आदि |
| चित्रकला एवं अन्य गतिविधियां | विद्यार्थियों की सहभागिता |
श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता पर भी होगा विशेष कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले मित्रता दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का संदेश भी दिया जाए, ताकि नई पीढ़ी मित्रता, समर्पण और संस्कारों के महत्व को समझ सके।
गुरु पूर्णिमा को बनाया जाएगा जनभागीदारी का उत्सव
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि-
समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
विद्यार्थियों में गुरु के प्रति सम्मान बढ़े।
भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति आस्था मजबूत हो।
निजी शिक्षण संस्थानों को भी अभियान से जोड़ा जाए।
किन विभागों की होगी जिम्मेदारी?
इस आयोजन में कई विभाग मिलकर काम करेंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग
उच्च शिक्षा विभाग
तकनीकी शिक्षा विभाग
चिकित्सा शिक्षा विभाग
जनजातीय कार्य विभाग
संस्कृति विभाग
पर्यटन विभाग
निजी शिक्षण संस्थान
कला एवं सांस्कृतिक संस्थाएं
क्यों खास है यह पहल?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्यों पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और गुरु-शिष्य परंपरा से भी जोड़ना है।