कोलकाता: पश्चिम बंगाल में वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन प्रत्याशियों के लिए चैन की नींद अभी कोसों दूर है। अधिकांश उम्मीदवारों का दिन अब स्ट्रॉन्ग रूम की पहरेदारी और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मतगणना (Counting) की रणनीति बनाने में बीत रहा है।
किसी ने खेली कैरम, तो कोई अस्पताल में व्यस्त
सजल घोष (BJP, बराहनगर): इन्होंने बताया कि स्ट्रॉन्ग रूम सील करते-करते सुबह हो गई थी, इसलिए दोपहर तक सोए और फिर दोस्तों के साथ कैरम खेलकर वक्त बिताया।
इंद्रनील खां (BJP, बेहाला पश्चिम): पेशे से डॉक्टर इंद्रनील ने बताया कि उनके लिए आराम का कोई सवाल ही नहीं है; उन्होंने मरीजों का इलाज किया और पार्टी बैठकें कीं।
EVM की सुरक्षा को लेकर भारी तनाव
श्रेया पांडे (TMC, मानिकतला): 103 डिग्री बुखार के बावजूद वह काम में जुटी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उल्टाडांगा में ईवीएम को बिना सील किए ले जाया जा रहा था, जिसे उन्होंने पकड़ा।
तापस राय (BJP, मानिकतला): वे दिन भर फोन पर व्यस्त रहे और स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी की। उन्होंने कहा कि 4 तारीख के बाद ही वह किताबें पढ़ने और आराम करने का समय निकालेंगे।
स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर 'कड़ा पहरा'
नौशाद सिद्दीकी (ISF, भांगड़): वे पूरा दिन जादवपुर में स्ट्रॉन्ग रूम के सामने बैठे रहे और इस दौरान उनका फोन भी बंद रहा।
शौकत मुल्ला (TMC, भांगड़): इन्होंने भांगड़ पार्टी ऑफिस में लंबी बैठक की और जादवपुर स्ट्रॉन्ग रूम में समय बिताया।
फिरहाद हकीम (TMC, कोलकाता पोर्ट): इनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं के लिए आराम जैसा कुछ नहीं होता, वोट के बाद भी बहुत काम बाकी हैं।
वामपंथी नेताओं की व्यस्तता
विकास भट्टाचार्य (CPM, जादवपुर): इन्होंने बताया कि सुबह से वे कानूनी मामलों और राजनीति के नियमित कामों में लग गए थे।
कलतान दासगुप्ता (CPM, पानीहाटी): सुबह घर पर चुनावी हिसाब-किताब करने के बाद शाम को पार्टी ऑफिस की बैठकों में शामिल हुए।