पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुआ, जहां वोटिंग प्रतिशत 93% तक पहुंच गया। हालांकि दूसरे चरण से पहले कुछ इलाकों से तनाव और अशांति की खबरें भी सामने आई हैं। इसके बावजूद चुनाव आयोग को पूरा भरोसा है कि इस बार बंगाल की चुनावी तस्वीर बदलेगी।
उपनगरीय इलाकों के लिए विशेष बूथ योजना
दूसरे चरण का मतदान मुख्य रूप से उपनगरीय क्षेत्रों में होना है। जिन बहुमंजिला आवासीय परिसरों में 300 से अधिक मतदाता हैं, ऐसे 79 स्थानों को चिन्हित कर वहीं मतदान केंद्र बनाए गए हैं। आयोग का मानना है कि इससे शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।
“अब कॉम्प्लेक्स के भीतर ही होगा मतदान”
विशेष पर्यवेक्षक और चुनाव पर्यवेक्षक सुभ्रत गुप्ता ने कहा कि पहले लोगों को अपने आवासीय परिसर से बाहर जाकर नजदीकी बूथों पर वोट डालना पड़ता था। लेकिन अब उन्हीं के कॉम्प्लेक्स में बूथ बनाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को सुविधा होगी और मतदान में सकारात्मक असर दिखेगा।
डर और बाधा की शिकायतों का समाधान
सुभ्रत गुप्ता ने बताया कि पहले कई मतदाता शिकायत करते थे कि वे बाहर जाकर वोट देने से डरते हैं या उन्हें रोका जाता है। अब कॉम्प्लेक्स के अंदर बूथ बनने से ऐसी समस्याएं काफी हद तक खत्म होंगी और मतदाता अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।
अतिरिक्त सुरक्षा के लिए क्विक रिएक्शन टीम तैनात
आयोग ने सिर्फ बूथ निर्माण तक ही योजना सीमित नहीं रखी है। जहां-जहां बहुमंजिला आवासीय परिसर हैं, वहां अतिरिक्त क्विक रिएक्शन टीम तैनात की जाएगी। यदि किसी मतदाता को बाहर जाकर भी मतदान करना पड़े, तो वहां भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
“100% बदलेगी बंगाल की चुनाव संस्कृति”
सुभ्रत गुप्ता ने विश्वास जताया कि इस बार मतदान प्रतिशत निश्चित रूप से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन परिसरों में बूथ बनाए गए हैं, वहां लोग निश्चित रूप से वोट देंगे। साथ ही जिन जगहों पर बूथ नहीं हैं, वहां भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उनका मानना है कि बंगाल की पुरानी चुनावी संस्कृति अब बदलने जा रही है।
मतदाताओं से घर से निकलने की अपील
उन्होंने कहा कि आयोग की तैयारी पूरी है, अब तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मतदाताओं की है। लोगों को घर से बाहर निकलकर मतदान करना होगा। आयोग को उम्मीद है कि इस बार बंगाल में वोटिंग कल्चर पूरी तरह बदलेगा।