कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी कामकाज में बंगाली भाषा के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में औपचारिक कदम आगे बढ़ाया है। राज्य सरकार ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब प्रशासनिक कामकाज और आम लोगों तक पहुंचने वाली सरकारी सेवाओं में बंगाली भाषा को प्रमुखता देने की तैयारी है।
सरकारी दस्तावेजों से लेकर आदेश तक बंगाली पर जोर
सरकार के नए निर्देशों का असर प्रशासनिक कामकाज के कई हिस्सों में दिखाई देगा। सरकारी दस्तावेज, पत्र, अधिसूचनाएं, आदेश, रिपोर्ट और आवेदन जैसे कामों में बंगाली के इस्तेमाल को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसका मकसद सरकारी व्यवस्था और आम नागरिकों के बीच भाषा की दूरी को कम करना है।
जनता से संवाद भी बंगाली में करने का निर्देश
सरकारी अधिकारियों को जनसेवा के दौरान लोगों से बंगाली में संवाद करने के लिए कहा गया है। आवेदन स्वीकार करने, उसका जवाब देने और सरकारी सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में भी बंगाली को प्राथमिकता दी जाएगी। शिकायत दर्ज कराने और उसके निपटारे के दौरान भी आम लोगों से बंगाली में संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
पुलिस और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभाग भी दायरे में
यह व्यवस्था केवल सामान्य प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस समेत कानून-व्यवस्था से जुड़े दूसरे सरकारी संस्थानों में भी इन निर्देशों को लागू करने की योजना है। यानी आम नागरिकों के साथ सरकारी संपर्क के प्रमुख क्षेत्रों में बंगाली का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
सरकारी भाषा समिति का होगा गठन
इस पूरी व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार एक सरकारी भाषा समिति गठित करेगी। समिति का उद्देश्य प्रशासन में भाषा संबंधी व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी कामकाज में बंगाली के इस्तेमाल को व्यवस्थित तरीके से लागू करने में मदद करना होगा।
मुख्य सचिव की अगुवाई में राज्यस्तरीय कमेटी
भाषा नीति के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर एक संचालन समिति भी बनाई जाएगी। इसके अलावा अलग-अलग सरकारी विभागों और जिलों में भी कार्यान्वयन समितियां गठित की जाएंगी, ताकि फैसले को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए।
बंगला अकादमी से भी ली जाएगी मदद
भाषा से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ सहायता के लिए पश्चिम बंगाल बंगला अकादमी की मदद लेने का फैसला किया गया है। जरूरत पड़ने पर अनुवाद और भाषा संबंधी सलाह भी अकादमी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
अनुवादक और भाषा विशेषज्ञों की होगी व्यवस्था
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भाषा नीति लागू करने के लिए जरूरी मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे। आवश्यकता के अनुसार बंगाली जानने वाले कर्मचारियों, अनुवादकों, टाइपिस्ट, प्रूफरीडर और भाषा विशेषज्ञों की व्यवस्था की जाएगी।
तीन महीने में विभागों को करना होगा आकलन
नए निर्देश जारी होने के तीन महीने के भीतर प्रत्येक सरकारी विभाग को अपनी मौजूदा व्यवस्था का आकलन करना होगा। इसमें कंप्यूटर सिस्टम, दस्तावेज प्रबंधन, ऑनलाइन सेवाएं, बंगाली जानने वाले कर्मचारियों की संख्या, प्रशिक्षण की जरूरत और अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों जैसी चीजों की समीक्षा की जाएगी।
ऑनलाइन सेवाओं में भी बढ़ेगा बंगाली का इस्तेमाल
सरकार की योजना सिर्फ कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। सरकारी वेबसाइट, डिजिटल सेवाएं, ऑनलाइन रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को भी बंगाली भाषा के अनुरूप तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे डिजिटल सरकारी सेवाओं में भी स्थानीय भाषा की मौजूदगी बढ़ेगी।
कर्मचारियों को दिया जाएगा भाषा संबंधी प्रशिक्षण
सरकारी कर्मचारियों को बंगाली में आधिकारिक दस्तावेज तैयार करने, सरकारी शब्दावली के इस्तेमाल और आम लोगों से बंगाली में संवाद करने को लेकर प्रशिक्षण देने की योजना है। हर विभाग और जिला प्रशासन को अपनी प्रगति की रिपोर्ट नियमित रूप से सरकार को भेजनी होगी।
1 सितंबर से नीति लागू करने की दिशा में कदम
यह पूरी पहल उस फैसले की अगली कड़ी है, जिसके तहत सुवेंदु अधिकारी सरकार ने 1 सितंबर 2026 से राज्य सरकार के सभी स्तरों पर बंगाली के इस्तेमाल को अनिवार्य करने की घोषणा की थी। केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों के साथ आधिकारिक संवाद के लिए बंगाली के साथ हिंदी के इस्तेमाल की बात भी कही गई थी।