कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया है। ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 के सख्ती से पालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सभी पुलिस थानों को निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि जिन धार्मिक स्थलों पर निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहां पहले संबंधित प्रबंधन को नियमों का पालन करने के लिए कहा जाए। यदि इसके बाद भी नियमों की अनदेखी जारी रहती है, तो प्रशासन स्वयं लाउडस्पीकर हटाने सहित आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगा। सरकार का कहना है कि यह अभियान किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है।
राज्यभर के थानों को जारी हुए निर्देश, तेज हुई प्रशासनिक हलचल
सरकार के आदेश के बाद राज्यभर के पुलिस थानों में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अधिकारियों को अपने-अपने थाना क्षेत्रों में ऐसे धार्मिक स्थलों की पहचान करने को कहा गया है, जहां ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन नहीं हो रहा है। कई स्थानों पर एक ही परिसर में आधा दर्जन या उससे अधिक लाउडस्पीकर लगाए जाने की शिकायतें प्रशासन के पास पहुंची हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस पहले स्थिति का आकलन करेगी और संबंधित प्रबंधन से नियमों का पालन कराने का प्रयास करेगी। यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जाता, तो प्रशासन सीधे हस्तक्षेप करेगा। सरकार ने साफ किया है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से अनिवार्य है।
धार्मिक स्थलों के प्रतिनिधियों के साथ होगी बैठक, पहले समझाया जाएगा नियम
सरकारी निर्देश के तहत मंगलवार को विभिन्न थाना क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों के प्रतिनिधियों और प्रबंधन समितियों को बुलाया जाएगा। बैठक के दौरान उन्हें ध्वनि प्रदूषण नियमों की जानकारी दी जाएगी और यह समझाया जाएगा कि लाउडस्पीकर का उपयोग किन परिस्थितियों में और किस सीमा तक किया जा सकता है। प्रशासन पहले अपील करेगा कि नियमों का स्वेच्छा से पालन किया जाए और अतिरिक्त या अवैध रूप से लगाए गए लाउडस्पीकर हटा दिए जाएं। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई अंतिम विकल्प होगी और उसका उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना है।
15 मई को जारी हुआ था नोटिस, अब शुरू हुआ अमल
राज्य सरकार ने इस कार्रवाई से पहले 15 मई 2026 को ही धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को नोटिस जारी कर ध्वनि प्रदूषण नियमों के पालन का निर्देश दिया था। उस समय स्पष्ट किया गया था कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय ध्वनि सीमा के भीतर ही किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि नोटिस जारी होने के बावजूद कई स्थानों पर नियमों का पालन नहीं किया गया और लगातार शिकायतें सामने आती रहीं। इसी वजह से अब प्रशासन ने चेतावनी के चरण से आगे बढ़ते हुए नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। पहले संबंधित प्रबंधन को स्वयं लाउडस्पीकर हटाने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन आदेश की अनदेखी करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का स्पष्ट संदेश- नियमों का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं
सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई धार्मिक स्थल निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि में लाउडस्पीकर चलाता है या प्रतिबंधित समय में उसका उपयोग करता है, तो प्रशासन संबंधित उपकरण हटाने के साथ कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह नियम सभी धर्मों, संस्थानों और संगठनों पर समान रूप से लागू होगा। सरकार का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना, छात्रों, बुजुर्गों, मरीजों और आम नागरिकों को अनावश्यक ध्वनि प्रदूषण से राहत दिलाना तथा पर्यावरण संबंधी कानूनों का पालन सुनिश्चित करना है।
क्या हैं ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000?
भारत सरकार ने 14 फरवरी 2000 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 लागू किए थे। इन नियमों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना और लोगों को अत्यधिक शोर से होने वाली परेशानियों से बचाना है। नियमों के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अधिकतम ध्वनि सीमा निर्धारित की गई है। दिन के समय औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतम 75 डेसीबल, व्यावसायिक क्षेत्र में 65 डेसीबल, आवासीय क्षेत्र में 55 डेसीबल तथा शांत क्षेत्र में 50 डेसीबल तक ध्वनि की अनुमति है। इससे अधिक ध्वनि स्तर को नियमों का उल्लंघन माना जाता है और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध
ध्वनि प्रदूषण नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं है। केवल विशेष परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने पर बंद स्थानों के भीतर सीमित उपयोग किया जा सकता है। रात के समय भी ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा के भीतर रखना अनिवार्य है। औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतम 70 डेसीबल, व्यावसायिक क्षेत्र में 55 डेसीबल, आवासीय क्षेत्र में 45 डेसीबल और शांत क्षेत्र में 40 डेसीबल तक ही ध्वनि की अनुमति है। सरकार ने सभी धार्मिक स्थलों, आयोजकों और प्रबंधन समितियों से इन नियमों का पालन करने की अपील की है और चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित समय में या निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि में लाउडस्पीकर चलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।