नई दिल्ली: अगर आप घर बनाने या मरम्मत का काम शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं, तो सीमेंट की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी आपके बजट को प्रभावित कर सकती है। सीमेंट कंपनियां अक्टूबर में देश के ज्यादातर बाजारों में 50 किलो की एक बोरी पर ₹5 से ₹20 तक दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। ब्रोकरेज फर्म सेंट्रम ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भी सीमेंट की कीमत औसतन ₹7 प्रति बोरी बढ़ी थी। अब कंपनियां एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी की कोशिश कर रही हैं। बढ़ती लागत और बाजार की परिस्थितियों के बीच कंपनियां अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए यह कदम उठा रही हैं। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी कितनी टिकती है, यह बाजार में मांग और डीलर्स की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। ऐसे में घर बनाने वाले लोगों के लिए आने वाले दिनों में निर्माण लागत बढ़ने की संभावना बन सकती है।
कंपनियों को कीमतें बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सीमेंट कंपनियों की ओर से कीमतें बढ़ाने के पीछे बढ़ती उत्पादन और परिवहन लागत को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। हाल के हफ्तों में ईंधन की कीमतों में तेजी आई है, जिससे सीमेंट के उत्पादन पर खर्च बढ़ा है। इसके अलावा, फैक्ट्रियों से सीमेंट को अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाने की लागत भी बढ़ी है। बढ़ी हुई लागत का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां लागत का कुछ हिस्सा सीमेंट की बिक्री कीमत में शामिल करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, सिर्फ कीमत बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, क्योंकि बाजार में मांग बनी रहना भी जरूरी है। अगर डीलर्स बढ़ी हुई कीमतों को स्वीकार नहीं करते या निर्माण गतिविधियों में कमी आती है, तो कंपनियों के लिए यह बढ़ोतरी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में कंस्ट्रक्शन बैन से क्या होगा असर?
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण गतिविधियों पर रोक का असर सीमेंट की मांग पर भी पड़ सकता है। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाले ध्वंस कार्य और खुले में होने वाले सिविल निर्माण पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके बाद 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक सभी तरह के निर्माण कार्यों पर कड़े प्रतिबंध लागू किए जाने हैं। इस अवधि में दिल्ली-एनसीआर में निर्माण गतिविधियां काफी प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर सीमेंट और दूसरी निर्माण सामग्री की स्थानीय मांग पर पड़ने की संभावना है। ऐसे में प्रतिबंध शुरू होने से पहले कंपनियों के लिए बढ़ी हुई कीमतों को बाजार में बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर अगर निर्माण गतिविधियां धीमी पड़ती हैं, तो डीलर्स की ओर से भी कीमतों को लेकर दबाव देखने को मिल सकता है।
सितंबर में किस क्षेत्र में कितना बढ़ा सीमेंट का भाव?
जुलाई और अगस्त में सीमेंट बाजार में सुस्ती के बाद सितंबर में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में देशभर में सीमेंट की औसत ट्रेड कीमत करीब ₹7 प्रति बोरी बढ़कर ₹356 प्रति 50 किलो बोरी पहुंच गई। क्षेत्रवार आंकड़ों की बात करें तो दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा ₹11 प्रति बोरी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पश्चिम भारत में सीमेंट की कीमत औसतन ₹9 प्रति बोरी बढ़ी। वहीं उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत में करीब ₹5 प्रति बोरी की बढ़ोतरी हुई। इससे पता चलता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कीमतों में बढ़ोतरी एक जैसी नहीं रही। अब अक्टूबर में प्रस्तावित ₹5 से ₹20 की बढ़ोतरी का असर भी बाजार और क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।
आम ग्राहकों और डीलर्स पर क्या होगा असर?
सीमेंट की कीमत बढ़ने से घर बनाने या मरम्मत कराने वाले आम ग्राहकों का कुल निर्माण बजट बढ़ सकता है। हालांकि, कंपनियों की ओर से की गई पिछली कीमत बढ़ोतरी का पूरा असर अभी ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। इसकी वजह यह है कि कई डीलर्स ने तिमाही बिक्री लक्ष्य पूरा करने के लिए पुराना स्टॉक पुरानी कीमतों पर ही बेचा है। इसलिए कुछ बाजारों में ग्राहकों को अभी भी पुराने या अपेक्षाकृत कम दाम पर सीमेंट मिल सकता है। नया स्टॉक आने के बाद बढ़ी हुई कीमतों का असर ज्यादा साफ दिखाई दे सकता है। आगे कीमतें कितनी टिकती हैं, यह बारिश कम होने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण गतिविधियों की रफ्तार पर निर्भर करेगा। अगर मांग मजबूत रहती है तो कंपनियां बढ़ी हुई कीमतों को बनाए रखने की कोशिश कर सकती हैं, जबकि मांग कमजोर होने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।