विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने दावोस में होने वाली अपनी वार्षिक बैठक से पहले स्वच्छ ईंधन को लेकर एक अहम अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर मौजूदा निवेश स्तर में बड़ा इजाफा नहीं किया गया, तो 2030 तक तय किए गए वैश्विक लक्ष्य पूरे नहीं हो पाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ ईंधन के लिए सालाना निवेश को बढ़ाकर कम-से-कम 100 अरब डॉलर करना जरूरी है।
स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा का संबंध
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ ईंधन न केवल जलवायु लक्ष्यों को साधने में मदद करते हैं, बल्कि देशों की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत बनाते हैं। पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होने से ऊर्जा आपूर्ति अधिक विविध और स्थिर बन सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की आशंका भी घटेगी।
रोजगार और आर्थिक वृद्धि में बड़ी भूमिका
डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वच्छ ईंधन क्षेत्र पारंपरिक ईंधन की तुलना में दो से तीन गुना अधिक नौकरियां पैदा कर सकता है। जैव ईंधन, हाइड्रोजन आधारित ईंधन और कम कार्बन वाले जीवाश्म ईंधन जैसे विकल्प उद्योग और परिवहन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर खोल सकते हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि को भी गति मिलेगी।
निवेश और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर
फिलहाल दुनिया भर में स्वच्छ ईंधन क्षेत्र में सालाना करीब 25 अरब डॉलर का ही निवेश हो रहा है, जो कुल स्वच्छ ऊर्जा निवेश का एक प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। रिपोर्ट में यह अंतर गंभीर चिंता का विषय बताया गया है, क्योंकि तरल और गैसीय ईंधन अभी भी दुनिया की कुल ऊर्जा जरूरतों का 56 प्रतिशत हिस्सा पूरा करते हैं।
उत्सर्जन घटाने में स्वच्छ ईंधन की भूमिका
स्वच्छ ईंधन को परिवहन और उद्योग जैसे उच्च उत्सर्जन वाले क्षेत्रों के लिए अहम समाधान बताया गया है। ये ईंधन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के साथ-साथ ऊर्जा परिवर्तन को व्यवहारिक और संतुलित बनाने में मदद कर सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा पर जाना फिलहाल संभव नहीं है।
चुनौतियां और नीतिगत जरूरतें
रिपोर्ट में स्वच्छ ईंधन परियोजनाओं के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है। इनमें शुरुआती लागत का अधिक होना, भविष्य की मांग को लेकर अनिश्चितता और देशों के बीच नीतिगत असमानता शामिल हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकारों, उद्योग जगत और वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और स्पष्ट, स्थिर नीतियों की आवश्यकता बताई गई है।
नीतिगत और वित्तीय रोडमैप का सुझाव
बैन एंड कंपनी के सहयोग से तैयार इस श्वेत-पत्र में ऐसे नीतिगत, कारोबारी और वित्तीय उपायों का खाका पेश किया गया है, जिनके जरिए स्वच्छ ईंधन के वैश्विक लक्ष्यों को भरोसेमंद और आर्थिक रूप से टिकाऊ परियोजनाओं में बदला जा सकता है। रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है कि मजबूत इच्छाशक्ति और बड़े निवेश के बिना स्वच्छ ईंधन की संभावनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी।
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