ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव का असर भारत पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने रसोई गैस की संभावित कमी से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार (5 मार्च 2026) को जारी आदेश में सरकार ने आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए देश की तेल रिफाइनरियों को एलपीजी (LPG) का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि घरेलू गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। अधिकारियों का मानना है कि यदि आयात में कमी आती है तो घरेलू उत्पादन बढ़ाकर इसकी भरपाई की जा सकती है।
जानकारी के मुताबिक एलपीजी मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस के मिश्रण से तैयार की जाती है। ऐसे में सरकार ने सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम उपयोग एलपीजी उत्पादन में करें। इसके अलावा प्रोपेन और ब्यूटेन का उत्पादन करने वाली कंपनियों से भी कहा गया है कि वे सरकारी रिफाइनरियों को इन गैसों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करें, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की सप्लाई बाधित न हो।
भारत में लगभग 33.2 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता
सरकारी निर्देशों के अनुसार तैयार की गई अतिरिक्त एलपीजी मुख्य रूप से सरकारी तेल कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो देशभर में घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की आपूर्ति करती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस समय भारत में लगभग 33.2 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश है। पिछले वर्ष देश में करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन कुकिंग गैस की खपत दर्ज की गई थी। देश की कुल जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा होता है और आयातित एलपीजी का करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संकट भारत की गैस आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण पर असर पड़ सकता है
हालांकि प्रोपेन और ब्यूटेन का ज्यादा उपयोग एलपीजी उत्पादन में करने से कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण पर असर पड़ सकता है। इनमें अल्काइलेट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें पेट्रोल में मिलाया जाता है। कुछ बड़ी कंपनियां, जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, हर महीने अल्काइलेट्स के कई कार्गो निर्यात करती रही हैं। ऐसे में कच्चे माल के उपयोग में बदलाव का असर उनके उत्पादन और निर्यात पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार ने रिफाइनरियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल फिलहाल पेट्रोकेमिकल उत्पादन की बजाय एलपीजी निर्माण में प्राथमिकता के साथ किया जाए, ताकि देश में रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे।