सोना महंगा होने से भारतीय ग्राहकों की खरीदारी करने के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्राहक हल्की ज्वेलरी कम कैरेट के आभूषण और पुराने सोने के एक्सचेंज को प्राथमिकता दे रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी डब्ल्यूजीसी के मुताबिक सोने की कीमतों में तेजी ने ग्राहकों को अपने बजट के अनुरूप खरीदारी करने के लिए प्रेरित किया है। हल्के वजन के आभूषणों की मांग बढ़ी है जबकि कम कैरेट की ज्वेलरी भी ग्राहकों के लिए एक विकल्प बन रही है। खरीदारी के फैसलों में कीमत के साथ एक्सचेंज ऑफर डिस्काउंट और भुगतान की सुविधा भी अहम भूमिका निभा रही है। महंगे सोने ने पारंपरिक खरीद पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है।
हल्की और कम कैरेट ज्वेलरी की बढ़ती मांग
ग्राहक अब भारी और ऊंचे कैरेट वाले आभूषणों के बजाय हल्के वजन की ज्वेलरी को तरजीह दे रहे हैं। कम कैरेट के आभूषण भी बजट में फिट होने के कारण लोकप्रिय हो गए हैं। कीमतें ऊंची होने के कारण लोग कम सोना लेकर भी डिजाइनिंग और दिखावे पर ध्यान दे रहे हैं। ज्वेलर्स के अनुसार हल्की ज्वेलरी की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। युवा पीढ़ी खासकर इस ट्रेंड को अपना रही है। त्योहारी सीजन में भी भारी आभूषणों की जगह हल्के विकल्प पसंद किए जा रहे हैं। यह बदलाव बाजार की नई दिशा तय कर रहा है।
गोल्ड एक्सचेंज बना महत्वपूर्ण विकल्प
महंगे सोने के बीच गोल्ड एक्सचेंज बाजार में ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। ग्राहक पुराने आभूषण देकर नई ज्वेलरी खरीद रहे हैं जिससे उन्हें पूरी रकम नए सिरे से खर्च नहीं करनी पड़ती। डब्ल्यूजीसी के अनुसार कुछ ज्वेलर्स के यहां एक्सचेंज के जरिए होने वाली बिक्री में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ मामलों में कुल बिक्री में एक्सचेंज का हिस्सा 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पुराने सोने को नई डिजाइनिंग में बदलवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे ग्राहकों को आर्थिक राहत मिल रही है।
कीमत डिस्काउंट और सुविधाओं का प्रभाव
खरीदारी के फैसलों में अब केवल कीमत ही नहीं बल्कि एक्सचेंज ऑफर डिस्काउंट और आसान भुगतान विकल्प भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। ज्वेलर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रहे हैं। पुराने सोने के बदले नई ज्वेलरी पर अतिरिक्त लाभ दिए जा रहे हैं। किस्तों में भुगतान की सुविधा भी मांग बढ़ा रही है। महंगे सोने के बावजूद बाजार में गतिविधि बनी हुई है क्योंकि ग्राहक वैकल्पिक तरीके अपना रहे हैं। यह ट्रेंड लंबे समय तक बना रह सकता है।
बाजार पर दीर्घकालिक असर
सोने की ऊंची कीमतों ने ज्वेलरी बाजार में स्थायी बदलाव ला दिए हैं। हल्की ज्वेलरी कम कैरेट और एक्सचेंज आधारित खरीद अब मुख्यधारा बनती जा रही है। ज्वेलर्स भी अपनी रणनीति इसी के अनुसार बदल रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। त्योहारी सीजन में भी यही रुझान देखने को मिल रहा है। ग्राहक अब समझदारी भरी खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुल मिलाकर महंगे सोने ने भारतीय ज्वेलरी बाजार का स्वरूप ही बदल दिया है।