मुंबई. देश का विदेशी मुद्रा भंडार 17 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के दौरान 2.36 अरब डॉलर बढ़कर 703.30 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह जानकारी Reserve Bank of India द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में 3.82 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी और यह 700.94 अरब डॉलर पर रहा था। लगातार हो रही यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
भू राजनीतिक घटनाओं का पड़ा असर
इस वर्ष फरवरी के अंत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष के चलते भंडार में गिरावट देखने को मिली। इस दौरान वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना रहा जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा।
रुपए पर दबाव और केंद्रीय बैंक की भूमिका
बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के कारण भारतीय रुपए पर दबाव बना रहा। इस स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। डॉलर की बिक्री के माध्यम से बाजार को संतुलित करने का प्रयास किया गया ताकि मुद्रा विनिमय दर में अत्यधिक उतार चढ़ाव को रोका जा सके। यह कदम आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
विदेशी मुद्रा आस्तियों में सुधार
आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा आस्तियां कुल भंडार का प्रमुख हिस्सा होती हैं और इसमें भी वृद्धि दर्ज की गई है। समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियां 1.48 अरब डॉलर बढ़कर 557.46 अरब डॉलर हो गईं। इन आस्तियों में विभिन्न वैश्विक मुद्राओं जैसे यूरो पाउंड और येन के मूल्य में होने वाले उतार चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है जिससे कुल भंडार की स्थिति प्रभावित होती है।
स्वर्ण भंडार और अन्य घटकों में वृद्धि
केंद्रीय बैंक के अनुसार स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी वृद्धि देखी गई है जो 79 करोड़ डॉलर बढ़कर 122.133 अरब डॉलर हो गया है। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार में भी वृद्धि दर्ज की गई है और यह 18.841 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास देश की आरक्षित स्थिति भी बढ़कर 4.87 अरब डॉलर हो गई है जो समग्र आर्थिक मजबूती का संकेत देती है।
आर्थिक स्थिरता की ओर मजबूत संकेत
विदेशी मुद्रा भंडार में यह लगातार वृद्धि देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक मानी जा रही है। यह न केवल वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षा कवच का काम करता है बल्कि निवेशकों के विश्वास को भी बढ़ाता है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर इसमें और बदलाव संभव है लेकिन फिलहाल यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।