नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले रेपो रेट को लेकर बड़ा अनुमान सामने आया है। SBI Research की रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती महंगाई, कमजोर रुपये और वैश्विक आर्थिक जोखिम RBI पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बना सकते हैं। रिपोर्ट में अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट में कम से कम 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। SBI Research का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। हालांकि, 2027 की शुरुआत में महंगाई के 6 प्रतिशत से नीचे आने की संभावना भी जताई गई है।
सितंबर में 5.65% तक पहुंच सकती है खुदरा महंगाई
SBI Research के अनुमान के अनुसार सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर करीब 5.65 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर और नवंबर में महंगाई 6.5 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। इससे RBI के लिए महंगाई को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन सकता है। पिछली मौद्रिक नीति बैठक के बाद से महंगाई का दबाव कई वस्तुओं में बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में बढ़ोतरी का दायरा पहले की तुलना में व्यापक हुआ है। हालांकि, 2027 की शुरुआत में महंगाई के फिर 6 प्रतिशत से नीचे आने का अनुमान है। इसी स्थिति को देखते हुए RBI अपने महंगाई और GDP के अनुमानों में बदलाव कर सकता है।
RBI बढ़ा सकता है 0.25% रेपो रेट
SBI Research ने अक्टूबर की MPC बैठक में रेपो रेट में कम से कम 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई के अलावा वैश्विक आर्थिक जोखिम भी RBI के लिए चिंता का कारण हैं। वहीं, रुपये में कमजोरी से भी आर्थिक स्थिरता पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है। दरों में बढ़ोतरी का उद्देश्य महंगाई के दबाव को कम करना हो सकता है। हालांकि, रेपो रेट बढ़ने का असर बैंकों की ब्याज दरों और लोन की लागत पर भी पड़ सकता है। RBI की MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने वाली है।
अगस्त के बाद बढ़ा महंगाई का दायरा
रिपोर्ट के अनुसार अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक के बाद महंगाई का दबाव बढ़ा है। जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। इसका मतलब है कि महंगाई की रफ्तार में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। SBI Research के मुताबिक अब अधिक संख्या में वस्तुएं महंगाई में योगदान दे रही हैं। जनवरी में खुदरा महंगाई में 90 प्रतिशत योगदान देने वाली वस्तुओं की संख्या 22 थी। अगस्त में यह संख्या बढ़कर 51 हो गई। इससे पता चलता है कि महंगाई का दबाव अब कई वस्तुओं और क्षेत्रों तक फैल गया है।
कमजोर मानसून से बढ़ सकता है खाद्य महंगाई का खतरा
SBI Research ने कमजोर मानसून को भी महंगाई के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम बताया है। रिपोर्ट के अनुसार 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून लंबी अवधि के औसत का करीब 87 प्रतिशत रहा। वहीं, देश के 43 प्रतिशत जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। कम बारिश का असर कृषि उत्पादन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश और मजबूत अल नीनो की स्थिति से रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका है। अगर रबी फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है तो खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। इससे आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।
GDP और महंगाई के अनुमान में बदलाव संभव
SBI Research के मुताबिक अक्टूबर की बैठक में RBI वित्त वर्ष 2026-27 के आर्थिक अनुमानों में बदलाव कर सकता है। रिपोर्ट में GDP वृद्धि के अनुमान में 0.30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। वहीं, महंगाई के अनुमान को भी 0.20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसका कारण आने वाले महीनों में महंगाई से जुड़े जोखिमों को माना जा रहा है। कमजोर रुपया और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी RBI के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक के सामने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। अब नजरें 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने वाली MPC बैठक के फैसले पर रहेंगी।