Mumbai | भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत मामूली गिरावट के साथ हुई। विदेशी निवेशकों की लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बिकवाली और मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सीमित दायरे में कारोबार करते नजर आए।
50 अंक की गिरावट के साथ खुला निफ्टी
कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 22,665 अंक पर खुला। यह पिछले बंद स्तर के मुकाबले करीब 50 अंक यानी 0.23 फीसदी की गिरावट है। वहीं, सेंसेक्स 72,441.15 अंक पर खुला और इसमें करीब 87.92 अंक यानी 0.12 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। बाजार की शुरुआती चाल से संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल वैश्विक बाजारों और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर नजर बनाए हुए हैं।
IT और Telecom शेयरों में तेजी
शुरुआती कारोबार में कुछ सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Nifty MidSmall IT & Telecom Index सबसे ज्यादा बढ़त वाले प्रमुख इंडेक्सों में रहा और इसमें 1 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा Nifty PSU Bank, Nifty Chemicals, Nifty Oil & Gas, Nifty Cement और Nifty Media में भी करीब 1 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली। इन सेक्टरों में खरीदारी ने बाजार की शुरुआती कमजोरी को कुछ हद तक सीमित रखा।
मेटल और फार्मा शेयरों पर दबाव
दूसरी ओर, मेटल शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी रही। Nifty Metal Index करीब 0.42 फीसदी नीचे कारोबार करता नजर आया। इसके अलावा हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल इंडेक्स में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बनाए रखा।
लगातार चौथे दिन FII बिकवाली
भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बनी हुई है। मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारतीय इक्विटी से पैसा निकाला। अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने मंगलवार को करीब 10,000 करोड़ रुपये की भारतीय इक्विटी बेची। विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने से बाजार में निवेशकों की सतर्कता बढ़ी है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया। उन्होंने करीब 7,000 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली।
ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बनी चिंता
बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिससे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव देखने को मिलता है। हालांकि, हालिया गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार के कुछ हिस्सों में वैल्यूएशन अपेक्षाकृत आकर्षक स्तर पर आने की चर्चा भी बाजार में है।
वैश्विक बाजारों पर भी निवेशकों की नजर
एशियाई बाजारों में बुधवार को व्यापक रूप से सकारात्मक रुख देखने को मिला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ था। अब निवेशकों की नजर अमेरिका के आगामी आर्थिक आंकड़ों, बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के रुझान पर रहेगी। इन संकेतों के आधार पर भारतीय बाजार में आने वाले सत्रों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।