मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों में देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था, महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

मिडिल ईस्ट संकट का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है।
- ब्रेंट क्रूड: 100 डॉलर प्रति बैरल के पार
- WTI क्रूड: लगभग 91.49 डॉलर प्रति बैरल
महंगे कच्चे तेल से भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट
तनाव और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच अमेरिकी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुए।
| इंडेक्स | बदलाव |
|---|---|
| Dow Jones | -0.97% |
| Nasdaq | -2.15% |
| S&P 500 | -1.21% |
हालांकि Intel के तिमाही नतीजे अनुमान से बेहतर रहे, लेकिन Tesla और Alphabet के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों में भी बिकवाली
अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर एशिया में भी देखने को मिला।
| इंडेक्स | बदलाव |
|---|---|
| Nikkei | -2.64% |
| Kospi | -2.45% |
| Hang Seng | -1.10% |
| Shanghai Composite | -0.01% |
निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव
ग्लोबल संकेतों के बीच Gift Nifty करीब 180 अंक की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जिससे भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आज सेंसेक्स और निफ्टी पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर देखने को मिल सकता है।
भारत पर 10% टैरिफ बरकरार
अमेरिका ने भारत पर 10% टैरिफ को बरकरार रखा है। पहले इसे बढ़ाकर 12.5% किए जाने की चर्चा थी, लेकिन फिलहाल 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 10% टैरिफ ही लागू रहेगा। यह फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और निर्यात क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आज इन कंपनियों के नतीजों पर रहेगी नजर
आज निवेशकों की नजर कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।
- IndiGo
- Infosys
इन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उनके शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
किन फैक्टर्स पर रहेगी बाजार की नजर?
- अमेरिका-ईरान तनाव
- कच्चे तेल की कीमतें
- अमेरिकी और एशियाई बाजारों का रुख
- भारत पर अमेरिकी टैरिफ
- तिमाही नतीजे
- विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां