देशभर में लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। चीनी के आयात को 31 अक्टूबर 2026 तक टैक्स फ्री कर दिया गया है। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाकर बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना और त्योहारी सीजन में मांग को पूरा करना है।
फिलहाल देश के कई हिस्सों में चीनी का खुदरा भाव करीब 55 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। पिछले दो महीनों में कीमतों में करीब 40% तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
8 साल बाद चीनी का आयात, मौसम बना बड़ी वजह
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने के उत्पादन में आई कमी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। बारिश और सूखे जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों ने कई इलाकों में गन्ने की फसल को प्रभावित किया है।गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, जबकि दूसरी ओर घरेलू मांग लगातार बढ़ती रही। उत्पादन और मांग के बीच अंतर बढ़ने से बाजार में चीनी की कीमतें तेजी से ऊपर गईं।इसी कमी को पूरा करने के लिए भारत करीब 8 साल बाद बड़े स्तर पर चीनी का आयात कर रहा है।
दो महीने में करीब 40% बढ़े दाम
गन्ने का उत्पादन घटने और खपत बढ़ने के कारण पिछले दो महीनों में चीनी के दाम करीब 40% तक बढ़ने की बात सामने आई है। मौजूदा समय में रिटेल बाजार में चीनी करीब 55 रुपये किलो के आसपास बिक रही है।बाजार में यह आशंका भी बनी हुई है कि अगले तीन महीनों तक कीमतें ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं। ऐसे में सरकार की टैक्स फ्री इम्पोर्ट नीति से घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने की उम्मीद है।
31 अक्टूबर तक टैक्स फ्री आयात
सरकार के आदेश के अनुसार आयात की जाने वाली चीनी की खेप 31 अक्टूबर 2026 तक देश में लानी होगी। आयात पर टैक्स में छूट देने का उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है।अगर पर्याप्त मात्रा में आयातित चीनी बाजार में पहुंचती है, तो सप्लाई बढ़ने से थोक और खुदरा कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है।
त्योहारों से पहले बढ़ती मांग की तैयारी
अक्टूबर में देश में दिवाली और दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाई, केक और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ती है, जिससे चीनी की खपत भी बढ़ जाती है।इसके अलावा बिस्कुट, मिठाई और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी त्योहारी सीजन से पहले बड़ी मात्रा में चीनी का स्टॉक तैयार करती हैं। ऐसे समय में बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना सरकार के लिए अहम चुनौती है।
हलवाइयों से लेकर आम लोगों को राहत की उम्मीद
सरकार को उम्मीद है कि बिना टैक्स के आयातित चीनी की अतिरिक्त मात्रा बाजार में आने से सप्लाई चेन मजबूत होगी। इससे त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।चीनी सस्ती होने की स्थिति में इसका फायदा मिठाई कारोबारियों, बेकरी और खाद्य कंपनियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।
30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक
घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा।सरकार ने चीनी को प्रतिबंधित कैटेगरी में रखा है। इसका मतलब है कि बिना सरकारी अनुमति के व्यापारी चीनी को देश से बाहर निर्यात नहीं कर सकेंगे।