राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब हिंदी माध्यम में भी एमबीबीएस (बैचरल ऑफ मेडिकल एंड बैचलर आफ सर्जरी) की पढ़ाई होगी। हिंदी दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसकी घोषणा की।
पत्रकार वार्ता में साय ने बताया कि इसी साल प्रथम सत्र 2024-25 में एमबीबीएस की पढ़ाई की सुविधा हिंदी में भी उपलब्ध होगी। मेडिकल कॉलेजों में हिंदी पुस्तकों का वितरण किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विभाग को निर्देश दिए हैं। हिंदी में चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने से ग्रामीण अंचल के छात्रों को फायदा मिलेगा।
इस वर्ष से ही एमबीबीएस की पढ़ाई
मेडिकल कॉलेजों में इस वर्ष से ही एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में करने का विकल्प लागू किया जा रहा है। साय ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो निर्णय लिया था वह हिंदी के विकास में अहम है। छत्तीसगढ़ में इस दिशा में हम प्राथमिकता से काम कर रहे हैं।
सरकार का सभी काम-काज हिंदी में हो इस पर जोर दिया जा रहा है। हिंदी की पढ़ाई होने से डॉक्टर्स और मरीजों के बीच इससे संवाद भी अच्छा होगा। अंग्रेजी का डर भी खत्म होगा। आने वाले समय में हिंदी में ही डाक्टर पर्ची भी लिख सकेंगे। पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा मौजूद रहे।
ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को फायदा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान में राज्य में 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। हिंदी में चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने का सबसे अधिक लाभ हमारे ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को होगा जो अधिकतर हिंदी मीडियम से होते हैं जो प्रतिभाशाली होते हैं लेकिन अंग्रेजी की वजह से उन्हें चिकित्सा पाठ्यक्रम में कुछ दिक्कत आती है।
अब यह दिक्कत दूर हो जाएगी। इससे चिकित्सा छात्र छात्राओं का आधार भी मजबूत होगा और अच्छे चिकित्सक तैयार करने में इससे अधिक मदद मिलेगी। मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने का यह सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इससे विषय की बारीक समझ बनती है। इसे हम छत्तीसगढ़ में हर स्तर पर कार्यान्वित करने के लिए कृत संकल्पित हैं।
मध्यप्रदेश और बिहार के बाद अब छत्तीसगढ़
मध्यप्रदेश, बिहार के बाद छत्तीसगढ़ देश का ऐसा तीसरा राज्य बन गया है, जहां हिंदी में भी मेडिकल की पढ़ाई होगी। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरुप नीट (यूजी) परीक्षा-2024 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के लिए इसी सत्र से हिंदी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम लागू हो गया है।
प्रदेश में एमबीबीएस की 2,110 सीटें
प्रदेश में 2,110 एमबीबीएस की सीटें हैं। दस शासकीय और तीन निजी कॉलेजों को मिलाकर 13 कॉलेजों में 1,910 सीटें थी। इस साल दो निजी कॉलेजों को मान्यता से प्रदेश के 15 मेडिकल कालेजों में 2,110 सीटें हो गई हैं। छह डेंटल कालेजों में बीडीएस की 600 की भी सीटें हैं।
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