MP NEWS - एमपी के खरगोन के बस हादसे में 24 लोगों की जान चली गई। इस दुर्घटना के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि, इस तरह की सड़क दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है। ( MP NEWS ) ऐसे लोगों को अब तक क्या सजा मिली है। क्या मोटर यान अधिनियम के तहत् कार्रवाई ऐसे लोगों के लिए पर्याप्त है या फिर ऐसे वाहन चालकों को ओर कड़ी सजा दी जाना चाहिए।
खरगोन में नदी के पुल से 40 फिट नीचे गिरी थी बस
खरगोन जिले के बोराड नदी के पुल से 40 फिट नीचे जो बस गिरी थी। उस बस का पहले से ही स्टेयरिंग फैल था। बावजूद इसके बस को ड्रायवर लापरवाही बरतते हुए ले गय़ा और यह बड़ा हादसा हो गया। आंकड़े बताते हैं कि, अब तक इस तरह के जितने भी हादसे हुए हैं उनमें लापरवाही बरती गई है। कोर्ट में भी इन मामलों में ज्यादातर ड्रायवरों को दोषी माना गया है।
आरटीओ खाना पूर्ति तक सीमित
इस मामले में यदि आरटीओ की बात की जाए। अधिकांश मामले में आरटीओ पुराने वाहनों को लेकर खाना पूर्ति करती नजर आती है। आरटीओ की निष्पक्षता को लेकर जब-तब सवाल भी उठते रहे हैं। यदि वास्तव में आरटीओ अपनी जिम्मेदारी समझे तो ऐसी घटनाओं में न केवल कमी आएगी बल्कि लोगों की जान भी बचेगी।
खदानों, रेत ईंट,गिट्टी के धंधे में लगे वाहन खतरे से खाली नहीं
देश-प्रदेश के अधिकांश जिलों में छोटे और बड़े ट्रक खदानों और रेत,ईंट, भट्टे आदि के कामों में लगे हुए हैं लेकिन यह वाहन इतने खतरनाक हैं कि कभी भी बड़े हादसे को अंजाम दे सकते हैं और इनमें काम कर रहे मजदूरों का जीवन खतरे में है। क्योंकि यह वाहन कबाड़ हो रहे हैं।
RTO की इन पर किसी तरह की कोई जांच पड़ताल नहीं होती है
आरटीओ की इन पर किसी तरह की कोई जांच पड़ताल नहीं होती है। अधिकांश मामलों में तो आरटीओ लेन देन करके मामला रफा दफा करती रही है और यह सिलसिला लगातार जारी है तो क्या जिम्मेदारों का यह खेल लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करता रहेगा या सरकारें इस पर कोई एक्शन लेंगी।
Written By - DILEEP PEL
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