लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को लगा बड़ा झटका। कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी ने छोड़ा कांग्रेस का साथ। भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने सुरेश पचौरी को दिलाई भाजपा की सदस्यता। वहीं सुरेश पचौरी के साथ पूर्व विधायक संजय शुक्ला, पूर्व विधायक विशाल पटेल, अर्जुन पलिया, एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अतुल शर्मा, कैलाश मिश्रा, अर्जुन पलिया, डॉ आलोक चंसोरिया भाजपा में शामिल होंगे। अब तक कुल 8 कांग्रेस नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की मिली सूचना।
कांग्रेस के टूटने का सिलिसिला जारी
प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, न्यू जोइंगिग कमेटी के संयोजक डॉ नरोत्तम मिश्रा सहित वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद। भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस के टूटने का सिलिसिला जारी। बता दें कि पचौरी गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे है। राहुल गांधी की भारत छोड़ो न्याय यात्रा में वे नजर नहीं आए थे। यात्रा में शामिल नहीं होने के बाद से उनके बीजेपी में जाने की अटकलें लगाई जा रही थी। वहीं बताया जा रहा है कि जॉइनिंग को लेकर दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से उनकी बातचीत हुई है।
सुरेश पचौरी का राजनीतिक करियर
1972 में सुरेश पचौरी ने युवा कार्यकर्ता के रूप में भारतीय युवा कांग्रेस से अपनी राजनीति पारी की शुरुआत की। 1981 में उन्हें मप्र युवा कांग्रेस का महासचिव बनाया गया, इस पद पर वे 1983 तक रहे। राजनीति में धीरे-धीरे ऊपर जा रहे पचौरी को 1984 में युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, इस पद पर वे एक साल रहे। कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी 1984 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए और फिर 1990, 1996 और 2002 में भी राज्यसभा गए।
केंद्रीय राज्य मंत्री भी बनाए गए
साल 1995 में सुरेश पचौरी ने एक केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में रक्षा मंत्रालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन और संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली। 2008 से 2011 तक वे मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और वर्तमान में कांग्रेस कमेटी के अनुसंधान और समन्वय विभाग के संयोजक हैं।
चुनाव नहीं जीत पाए पचौरी
कांग्रेस के दिग्गज देना सुरेश पचौरी की राजनीति पारी काफी लंबी है, लेकिन वे जमीनी स्तर पर कमाल नहीं दिखा पाए। उन्होंने अपने अब तक के राजनीति सफर में दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों में ही हार का सामना करना पड़ा। पचौरी 1999 में भोपाल लोकसभा सीट से उमा भारती के सामने चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन 1.6 लाख से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा। साल 2013 में भोजपुर से सुरेंद्र पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन इस भी हार गए।
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