Bhind: भिंड में प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है ,जहां मुक्तिधाम नहीं होने के चलते बुजुर्ग महिला का खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार किया गया वही अर्थी को बारिश से बचाने के लिए लोगों ने त्रिपाल का सहारा लिया।
त्रिपाल का सहारा लेना पड़ा
दरअसल,नौधनी गांव में 90 साल की बुजुर्ग महिला की मौत हो गई थी,लेकिन मुक्तिधाम नहीं होने के कारण परिजनों को त्रिपाल का सहारा लेना पड़ा, जहां अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों ने बॉडी को जलाने के लिए लकड़ी और ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग किया। तब जाकर वृद्ध महिला का अंतिम संस्कार हो सका।
मुक्तिधाम बनवाने की मांग की जा चुकी
इस दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन से कई बार मुक्तिधाम बनवाने की मांग की जा चुकी है लेकिन किसी के कानों तक जूं नहीं रेंगी, वही जब इस मामले में जिला पंचायत सीईओ जेके जैन पूछा गया तो वह मीडिया के सवालों से बचते नजर आए।
सड़क पर अंतिम संस्कार किया
आपको बता दें कि, बीते साल 22 सितंबर को भिंड के ही अजनोल गांव में मुक्तिधाम ना होने के चलते बारिश में ग्रामीणों ने बीच सड़क पर अंतिम संस्कार किया था। वहीं 21 अगस्त को चौकी गांव में पाइप और टीन के तख्ती लगाकर महिला का अंतिम हुआ था, गोहद के मानपुरा गांव में मैं भी वृद्ध महिला की अंतरिम सरकार में त्रिपाल ताननी पड़ी थी।
नवंबर तक होने थे जिले में सभी गांव में मुक्तिधाम के निर्माण, इन तीनों घटनाओं के बाद जिला पंचायत सीईओ जेके जैन ने 1 नवंबर तक सभी पंचायतों में मुक्तिधाम बनवाने के आदेश जारी कर दिए थे, लेकिन सरपंच सचिवों ने आदेशों को ठेंगा दिखाकर मुक्तिधाम तो बनवाना दूर अंतिम संस्कार के लिए किसी भी प्रकार की अस्थाई व्यवस्था तक नहीं की गई, जबकि नोंधनी गांव में मुक्तिधाम बनवाने के आदेश छ महीन पहले ही मिल चुके हैं, लेकिन सरपंच सचिव की लापरवाही के चलते मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो सका, अब देखने वाली बात होगी जिला प्रशासन लापरवाही करने वालों पर क्या कार्यवाही करता है
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