IIT इंदौर के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक डिजिटल एप्लिकेशन विकसित किया है, जो लगभग वास्तविक समय में आर्द्रभूमियों के स्वास्थ्य की निगरानी कर सकता है। यह एप्लिकेशन प्रदूषण, पोषक तत्वों की अधिकता और अन्य पर्यावरणीय खतरों की पहचान समय रहते कर लेता है, जिससे इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा आसान हो जाती है। इस परियोजना का नेतृत्व सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मनीष कुमार गोयल और उनके शोधार्थी विजय जैन ने किया है। यह उपग्रह चित्रों और क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक का उपयोग करके जल गुणवत्ता का सटीक विश्लेषण करता है और गंभीर समस्याओं का पूर्वानुमान लगाता है।
आर्द्रभूमियों का महत्व और मौजूदा चुनौतिया
आर्द्रभूमियां पृथ्वी की “जीवन रेखा” कही जाती हैं, ये जल को स्वच्छ करती हैं, बाढ़ को नियंत्रित करती हैं, कार्बन का भंडारण करती हैं और अनेक प्रजातियों को आवास प्रदान करती हैं। यद्यपि ये पृथ्वी की सतह का मात्र 9% हिस्सा कवर करती हैं, लेकिन वैश्विक पारिस्थितिक सेवाओं में 23% से अधिक योगदान देती हैं।
नया उपकरण कैसे करेगा मदद
पारंपरिक रूप से आर्द्रभूमियों की निगरानी मैन्युअल जल नमूनाकरण और प्रयोगशाला परीक्षणों पर निर्भर रही है, जिससे समय पर कार्रवाई में देरी होती थी। आईआईटी इंदौर का यह नया एप्लिकेशन Sentinel-2 उपग्रह डेटा का उपयोग करता है, जिसमें 10 मीटर स्थानिक और 5 दिन की टेम्पोरल रिजाल्यूशन है। यह चार प्रमुख सूचकांकों NDCI (क्लोरोफिल मात्रा), NDTI (गंदलापन), NDWI (मीठे पानी की उपलब्धता) और NDMI (जलीय वनस्पति में नमी) का विश्लेषण कर आर्द्रभूमि की समग्र स्थिति का आकलन करता है।
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