सोमवार को उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू कर दी। वहीं मध्य प्रदेश सरकार पिछले तीन साल से इस मुद्दे पर नरम रुख अपना रही है। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने भाजपा के मुख्य एजेंडे में से एक को लागू किया है।
2022 से अटका है मामला
मध्य प्रदेश में यूसीसी के क्रियान्वयन के लिए 2022 में समिति गठित करने की घोषणा की गई थी, लेकिन सरकार आगे नहीं बढ़ी। 1 दिसंबर, 2022 को तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि वह यूसीसी लागू करने के पक्ष में हैं। यह मुद्दा तब राष्ट्रीय चर्चा में आया, जब पीएम मोदी ने 27 जून, 2023 को भोपाल में यूसीसी लागू करने की जोरदार वकालत की। ऐसा लगता है कि एमपी सरकार इस मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए केंद्रके निर्देश का इंतजार कर रही है।
2023 से थी लागू होने की उम्मीद
शीर्ष अधिकारियों ने यूसीसी पर आगे बढ़ने के लिए एमपी के इच्छुक न होने का कारण बताते हुए कहा कि जो राज्य पहले ऐसा करता है, उसे सारा श्रेय मिलता है। अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व द्वारा हरी झंडी दिए जाने पर मध्य प्रदेश यूसीसी पर आगे बढ़ेगा। 2023 से मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू होने की उम्मीद थी।
क्या है यूसीसी
UCC का मतलब है पूरे देश में सभी नागरिकों के लिए एक सा कानून। इससे धर्म, जाति या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। सभी मामलों में एक समान कानून लागू होगा। इससे न्यायिक प्रक्रिया सरल होगी और विवाद कम होंगे। UCC के अंतर्गत विवाह, तलाक, गोद लेना और संपत्ति का बंटवारा जैसे व्यक्तिगत मामले आएंगे। UCC लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे। भेदभाव की गुंजाइश कम होगी। कानूनी प्रक्रिया आसान होगी। हालांकि, इस पर कई तरह की बहस भी चल रही है।
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