रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित जमीन मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर जिले के अभनपुर और धमतरी के कुरूद में तड़के हुई छापेमारी से हड़कंप मच गया। कई जमीन कारोबारियों, जनप्रतिनिधियों से जुड़े लोगों और संदिग्धों के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई है।
कुरूद और अभनपुर में एक साथ कार्रवाई
ED की टीम ने धमतरी जिले के कुरूद में भूपेंद्र चंद्राकर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की। वहीं रायपुर जिले के अभनपुर में जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनके सहयोगियों के ठिकानों को भी खंगाला गया। बताया जा रहा है कि यह मामला जमीन अधिग्रहण के दौरान 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले से जुड़ा है।
फर्जी दस्तावेजों से बढ़ाया गया मुआवजा
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोप है कि मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। नियमों को दरकिनार कर कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। ED की टीम दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन की गहन जांच कर रही है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, अफसर निलंबित
इस मामले में इससे पहले राज्य सरकार भी अनियमितताओं को स्वीकार कर चुकी है। कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों—जिनमें अतिरिक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार और पटवारी शामिल हैं—को निलंबित किया गया था। बताया जाता है कि 2022 में शुरू हुई जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई थी।
ऐसे हुआ घोटाले का खेल
जांच में सामने आया है कि 6 गांवों की जमीन में खसरा नंबरों के कई टुकड़े किए गए। इसके बाद मुआवजे की राशि को 10 से 20 गुना तक बढ़ाया गया। आरोप है कि अफसरों और भूमाफियाओं की मिलीभगत से पूरा खेल रचा गया।
सियासत भी गरमाई, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने
इस हाई-प्रोफाइल मामले में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस जहां ED की कार्रवाई को देर से लेकिन सही बता रही है, वहीं बीजेपी का कहना है कि कथित घोटाला कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था। बीजेपी का आरोप है कि उस समय भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया, जबकि कांग्रेस अब जवाबदेही से बच रही है। वहीं कांग्रेस लगातार इस मामले में बड़े नामों पर कार्रवाई की मांग कर रही है।