भोपाल में एक बड़ा ही रोचक किस्सा सामने आया। यहा पर एक ड्राई क्लीनर ने महिला प्रिंसिपल की लहंगा-चुनरी को ड्राई क्लीन करते वक्त खराब कर दिया। जिसकी वजह से उसका कलर उड़ गया। इसे लेकर महिला के प्रोफेसर पति ने ड्राई क्लीनर को एक लीगल नोटिस भेज दिया। जिसके बाद ड्राई क्लीनर ने अपनी गलती मानी और कपड़ों की पूरी कीमत चुकाई।
कमला नगर इलाके में स्थित साईं कृपा ड्राई क्लीनर्स को दिया था
बता दें कि वकील दीपक बुंदेले ने बताया कि सिद्धांत पैलेस अवधपुरी के रहने वाले मनीष दुबे प्रोफेसर हैं। उनकी पत्नी लता दुबे शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज दमोह में प्रिंसिपल हैं। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए लहंगा-चुनरी खरीदा था। जिसे किसी फंक्शन में बस एक बार पहना गया था। लेकिन गंदा होने होने के कारण उन्होंने लहंगा-चुनरी और ब्लाउज ड्राई क्लीनिंग के लिए कमला नगर इलाके में स्थित साईं कृपा ड्राई क्लीनर्स को दिया था। जिसे ड्राई क्लीनर ने हफ्तेभर बाद वापस देने की बात कही।
लहंगा-चुन्नी-ब्लाउज का रंग बदला हुआ मिला
लेकिन जब मनीष लहंगा लेने पहुंचे तो लहंगा-चुन्नी-ब्लाउज का रंग बदला हुआ मिला। फिर उन्होंने इसकी शिकायत की और शिकायत करने पर दुकान मालिक ने अपनी गलती मानी। उसने कहा कि कपड़े हमारे स्टाफ की गलती से ही खराब हुए हैं। उसने कपड़ों को ठीक करके 10 दिन में देने की बात कही। 10 दिन बाद दुकानदार को फोन किया, तो वो 2-3 दिन में देने की बात करते हुए बातों को घुमाने लगा।
दुकानदार के खिलाफ वकील के द्वारा लीगल नोटिस भिजवाया
प्रोफेसर ने आखिर में बड़ा परेशान होकर अपने ग्राहक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दुकानदार के खिलाफ वकील के द्वारा लीगल नोटिस भिजवाया। नोटिस में दुकानदार से कपड़ों के पूरे पैसे देने की बात कही गई। साथ ही, मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए 5 लाख रुपए मुआवजा दिलाने की भी मांग की। नोटिस में राशि नहीं लौटाने पर कानूनी कार्रवाई की बात भी कही गई। इससे दुकानदार घबरा गया। उसने लहंगे की पूरी कीमत 27 हजार 290 रुपए प्रोफेसर को दे दिए।
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केस को उपभोक्ता फोरम में ले जाते
वकील ने बताया कि अगर ड्राई क्लीनर्स कपड़ों की कीमत नहीं देता, तो वो केस को उपभोक्ता फोरम में ले जाते। हालांकि ड्राई क्लीनर्स ने इससे पहले खुद ही समझौता कर लिया। उसने कपड़ों की कीमत दे दी है।
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