उत्तराखंड के बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में अब केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति होगी। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTS) के अनुसार, सदियों पुराने इन मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाएगा। यह निर्णय समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों पर लागू होगा। BKTS के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस फैसले को लागू करने के लिए मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में औपचारिक प्रस्ताव रखा जाएगा।
23 अप्रैल से फिर खुल जाएगा
बद्रीनाथ मंदिर, जो सर्दियों में लगभग छह महीने बंद रहता है, 23 अप्रैल से फिर खुल जाएगा। वहीं, केदारनाथ मंदिर के पुनः खुलने की तारीख महाशिवरात्रि के अवसर पर घोषित की जाएगी। उत्तराखंड के चार धाम में बद्रीनाथ और केदारनाथ के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री भी शामिल हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट 19 अप्रैल, अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे।
हर की पौड़ी पर ‘गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित’ पोस्टर लगाए गए
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बहस चल रही है। इसी महीने की शुरुआत में हरिद्वार के हर की पौड़ी पर ‘गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित’ पोस्टर लगाए गए, जिससे विवाद पैदा हुआ। इन पोस्टरों में हर की पौड़ी क्षेत्र को ‘हिंदू क्षेत्र’ बताया गया था, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक पहुंच को लेकर बहस तेज हो गई। श्री गंगा सभा द्वारा लगाए गए पोस्टरों में लिखा था, “गैर-हिंदुओं के लिए प्रवेश वर्जित क्षेत्र।” संगठन ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल लोगों को जानकारी देना है और इसका कोई गलत इरादा नहीं है।
लोगों को नियम और विनियमों की जानकारी देना जरूरी
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हाल की घटनाओं के कारण लोगों को नियम और विनियमों की जानकारी देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पोस्टर और जागरूकता बोर्डों का मकसद आम जनता, श्रद्धालु और पर्यटकों को उनके अधिकार और कर्तव्य के बारे में अवगत कराना है ताकि कानून-व्यवस्था और समाज में शांति बनी रहे। नितिन गौतम ने यह भी कहा कि हाल के विवादों का मुख्य कारण जानकारी की कमी थी और जागरूकता अभियान इसके समाधान के लिए किया जा रहा है।
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