मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश एक बड़ा राज्य है, इसलिए इसकी जरूरतें भी बड़ी हैं। सबके कल्याण के जरिए एक समतामूलक समाज और लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना ही केन्द्र और राज्य सरकारों का एकमेव लक्ष्य है। केन्द्र और राज्यों के बेहतर तालमेल और आपसी सामंजस्य से ही यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। राज्यों की मजबूती में ही राष्ट्र की मजबूती है, इसलिए केन्द्रीय करों और राजस्व प्राप्तियों में राज्यों की हिस्सेदारी अर्थात् अनुदान बढ़ाया ही जाना चाहिए। राज्य अपनी क्षमता और सीमित संसाधनों से ही अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए पूरी शिद्दत से काम करते हैं। केन्द्र सरकार से अधिक वित्तीय अनुदान मिलने से राज्य अपने दीर्घकालीन लक्ष्यों को अल्पकाल में ही प्राप्त कर सकेंगे। विकसित भारत का निर्माण विकसित मध्यप्रदेश के बिना नहीं हो सकता, इसलिए केन्द्रीय करों मेंराज्यों की हिस्सोदारी 44 प्रतिशत से बढ़ाकर 48 प्रतिशत तक की जाए। इससे राज्य मजबूत होंगे और राष्ट्र को विकास की ले जाने में सहायक होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त आयोग से कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और इसीलिए हम नदियों को जोड़कर जल बंटवारे के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना में हमने राजस्थान के साथ मिलकर काम किया। केन्द्र सरकार ने इस राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के लिए 90 हजार करोड़ रूपए आवंटित किए। इसी तरह केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए हम उत्तरप्रदेश सरकार के साथ आगे बढ़े हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों राष्ट्रीय परियोजना का भूमिपूजन कर मध्यप्रदेश को गौरव प्रदान किया है। अब हम महाराष्ट्र सरकार के साथ ताप्ती नदी परियोजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज से 20 साल पहले तक प्रदेश में केवल 7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिचिंत थी, आज प्रदेश की 48 लाख से अधिक कृषि भूमि को हम सिंचित कर चुके हैं। हम प्रदेश में नदी जोड़ो के लिए एक अभियान चला रहे हैं। किसानों के साथ हमारा आत्मीय संबंध है और खेतों तक पानी पहुंचाना हमारा पहला कर्तव्य है। हमारी नीतियों के कारण किसानों का जैविक खेती की ओर तेजी से रूझान बढ़ा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी 18 नई औद्योगिक नीतियों के कारण निवेशक भी हमसे जुड़ रहे हैं। आरआईसी और जीआईएस के जरिए प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। यह हम पर बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। हम हर जिला कलेक्ट्रेट में उद्योग प्रकोष्ठ बना रहे हैं, इससे किसी भी निवेशक को जिला स्तर पर भी कठिनाई नहीं आएगी। हम प्रदेश में व्यापार और व्यवसाय को सुगम बना रहे हैं। इसमें हम सभी का सहयोग भी लेंगे।
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