भोपाल शहर के आसपास बनी खदानें और जलाशय लोगों के लिए जानलेवा बन रहे हैं। खदानों और तालाबों में डूबने से दुघर्टनाएं हो रही हैं। कई बार लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है। सोमवार को बैरिसया क्षेत्र के ललरिया गांव और बिलखिरिया क्षेत्र के कान्हासैया में डूबने से चार लोगों की मौत हो गई। वहीं अप्रैल के महीने में रातीबड़ क्षेत्र में डूबने से दो सगी बहनों की डूबने से मौत हो गई थी। आगे ऐसी घटनाएं न हों इसे रोकने के लिए कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने खदानों की फेंसिंग कराने या खाली कराने के निर्देश दिए हैं।
बैरसिया क्षेत्र में तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत
बैरसिया क्षेत्र के ललरिया गांव में सोमवार को तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई। घटना का पता चलते ही पुलिस, प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और तलाश शुरू कर दी थी। इस दौरान एक बच्चे का शव तालाब से निकाल लिया गया था। दो बच्चों के शव सुबह निकाले गए। ललरिया गांव के रहने वाले तीन बच्चे रविवार शाम पांच बजे घर से निकले थे। देर रात तक वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। इस दौरान गांव से दो किलोमीटर दूर स्थित तालाब के किनारे बच्चों के कपड़े रखे मिले। परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
सुबह घर से निकली महिला का खदान में मिला शव
29 जुलाई को बिलखिरिया क्षेत्र में रहने वाले वाली वृद्धा का शव खदान में मिल। वृद्धा सोमवार सुबह करीब 5 बजे शौच के लिए घर से निकली थी। 9 बजे तक नहीं लौटी तो परिजनों ने तलाश शुरू की। सुबह 11 बजे करीब थाना बिलखिरिया में गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे। वहां से पुलिस तलाश के लिए साथ रवाना हुई। खदान पर पहुंचे तो एक किनारे पर शव तैरता दिखा।
खेत में बनें तालाब में डूबने से दो की मौत
12 अप्रेल को रातीबड़ के ग्राम बड़झिरी में रहने वाली दो सगी बहनों की ग्राम आमला में खुद के खेत में बने तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। दोनों मां के साथ खेत पर गई हुई थीं और खेलते-खेलते तालाब पर पहुंच गईं। दोनों बहने तालाब में बने पाइप से खेलते समय तालाब में गिर गईं और डूबने से दोनों की मौत हो गई थी। दीप्ति पांचवीं और तनुश्री तीसरी कक्षा में पढ़ती थी।
कलेक्टर पहुंचे घटना स्थल पर
सोमवार को दो जगहों पर हुए हादसों के बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे और तालाब व खदान का निरीक्षण किया। इस दौरान कलेक्टर ने नजूल क्षेत्र के अधिकारियों को खदान और तालाब को खाली कराने के निर्देश दिए। साथ ही खदानों को फेंसिंग कराने या उन्हें खाली कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस तरह की दुर्घटना न हो।
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