रायपुर। NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में NSUI कार्यकर्ताओं और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प देखने को मिली। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसके बाद मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया।
छात्रों की आवाज दबाने का आरोप
कांग्रेस और NSUI ने पुलिस कार्रवाई को छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। विपक्ष का कहना है कि छात्र परीक्षा में पारदर्शिता और अपने भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया।
कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्रों की मांगों पर संवाद होना चाहिए था, न कि लाठीचार्ज।
प्रशासन का पक्ष – कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई
वहीं प्रशासन और सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। प्रशासन के मुताबिक स्थिति को नियंत्रण में रखने और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि केंद्र सरकार NEET पेपर लीक मामले में कार्रवाई कर रही है, जबकि कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति करने में लगी हुई है।
पेपर लीक से ज्यादा लाठीचार्ज पर चर्चा
NEET परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में छात्रों का आक्रोश स्वाभाविक माना जा रहा है। लेकिन बिलासपुर में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद अब बहस का केंद्र पेपर लीक से हटकर लाठीचार्ज बन गया है।
एक तरफ विपक्ष छात्रों के समर्थन में सरकार को घेर रहा है, तो दूसरी ओर भाजपा कांग्रेस और NSUI पर माहौल खराब करने का आरोप लगा रही है। ऐसे में छात्रों का मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।