केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन कगार’ के तहत नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में लगातार दबाव बनाया जा रहा था। इसी क्रम में सबसे बड़ी उपलब्धि तब सामने आई जब माओवादी संगठन CPI (Maoist) के जनरल सेक्रेटरी तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने हथियार डाल दिए। उनके आत्मसमर्पण से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति जमीन पर प्रभावी होती जा रही है और माओवादी नेटवर्क का शीर्ष नेतृत्व अब कमजोर स्थिति में पहुंच गया है।
तेलंगाना पुलिस के सामने शांतिपूर्ण सरेंडर
सूत्रों के अनुसार देवजी ने तेलंगाना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। लंबे समय से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और सुरक्षा बलों द्वारा लगातार बनाए गए दबाव ने अंततः उन्हें सरेंडर के लिए मजबूर कर दिया। यह आत्मसमर्पण शांतिपूर्ण माहौल में हुआ, जिससे स्पष्ट हुआ कि देवजी अब संघर्ष छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हैं।
25 लाख के इनामी देवजी के सरेंडर का बड़ा प्रभाव
सरकार ने देवजी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, जो उनकी खतरनाक गतिविधियों और संगठन के भीतर उनकी ऊंची स्थिति का संकेत था। उनका सरेंडर न केवल माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है, बल्कि यह सुरक्षा बलों के लिए मनोबल बढ़ाने वाली उपलब्धि भी है। माना जाता है कि देवजी कई बड़े उग्रवादी अभियानों के मास्टरमाइंड रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी अथवा सरेंडर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता में शामिल थी।
ऑपरेशन कगार की रणनीति को मिला मजबूती का आधार
‘ऑपरेशन कगार’ का उद्देश्य माओवादी गतिविधियों का आधार कमजोर करना और शीर्ष नेतृत्व को निष्क्रिय करना है। इस अभियान के तहत सुरक्षा बलों ने जंगल क्षेत्रों में दबाव बढ़ाया, खुफिया नेटवर्क को मजबूत किया और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बढ़ाया। देवजी का आत्मसमर्पण इस रणनीति के सफल होने का एक स्पष्ट प्रमाण बनकर सामने आया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि माओवादियों के भीतर असंतोष और दबाव दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।
स्थानीय सुरक्षा और विकास पर सकारात्मक प्रभाव
राज्य सरकार और केंद्र के संयुक्त प्रयासों ने जिस तरह से माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाया है, उससे प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास का माहौल मजबूत हो रहा है। देवजी जैसे बड़े नेता के आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा बलों को भविष्य की रणनीतियों को और प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी। इससे स्थानीय जनता में भी सुरक्षा बलों के प्रति भरोसा बढ़ेगा और भय का माहौल कम होगा, जो दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के लिए आवश्यक है।
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