बालोद। बालोद जिले के दुधली गांव में आयोजित पहले राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी कार्यक्रम का आज भव्य समापन हो गया। देशभर से पहुंचे स्काउट–गाइड रोवर–रेंजर प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उदाहरण बना दिया। समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव और स्कूली शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
जंबूरी के अंतिम दिन कार्यक्रम स्थल पर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। अतिथियों के आगमन पर बस्तर की पारंपरिक लोकसंस्कृति रेला–पाटा के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया गया। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं ने शुरुआत से ही सभी का मन मोह लिया।
इस राष्ट्रीय जंबूरी की सबसे खास बात यह रही कि देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर–रेंजर प्रतिभागी अपनी-अपनी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। प्रतिभागियों ने लोकनृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान को मंच पर प्रस्तुत किया, जिससे पूरा आयोजन राष्ट्रीय सांस्कृतिक संगम में तब्दील हो गया।
समापन समारोह में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के स्काउट–गाइड छात्रों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने स्काउट–गाइड आंदोलन की मूल भावना—अनुशासन, सेवा और एकता—को प्रभावशाली रूप से प्रदर्शित किया।
इसके पश्चात अतिथियों द्वारा देशभर से आए सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बालोद में आयोजित पहले राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी की सराहना करते हुए इसे युवाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन ने बालोद जिले को देशभर में नई पहचान दिलाई है। अनुशासन, नेतृत्व, सेवा और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला यह जंबूरी न केवल प्रतिभागियों के लिए यादगार बना, बल्कि छत्तीसगढ़ की अतिथि-सत्कार परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि को भी राष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर गया।
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