रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार को लेकर अब सियासत और प्रशासन आमने-सामने नजर आ रहे हैं। एक तरफ जनप्रतिनिधियों द्वारा मंच से अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने इसे कर्मचारियों के सम्मान और मनोबल से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है।
कर्मचारियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा: फेडरेशन
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने इस पूरे मामले में कड़ा रुख अपनाया है। फेडरेशन का कहना है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है। फेडरेशन के प्रांतीय महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि सरकार का सुशासन तिहार कर्मचारियों के माध्यम से ही संचालित होता है और विभागीय कर्मचारी जनता के रुके हुए कार्यों का निराकरण करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छोटे जनप्रतिनिधि कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और सोशल मीडिया में उसका प्रचार-प्रसार भी किया जाता है, जिससे कर्मचारी आहत होते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को एक दायरे में रहकर समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। बैज ने कहा कि सुशासन तिहार पूरी तरह फेल साबित हुआ है और यह केवल टाइम पास का कार्यक्रम बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास कोई ठोस काम नहीं है और समीक्षा की बजाय केवल दिखावा किया जा रहा है।
सरकार ने किया बचाव
वहीं सरकार ने फेडरेशन की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं को उठाना और उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना है। मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि इसे “रीलबाजी” कहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि दोनों को सामंजस्य के साथ जनता के हित में काम करना चाहिए, तभी सुशासन का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
प्रशासन बनाम राजनीति की बहस तेज
सुशासन तिहार को लेकर उठे इस विवाद ने प्रशासनिक कार्यशैली और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर कर्मचारी संगठन सम्मान और गरिमा की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार जनप्रतिनिधियों की भूमिका को जनता के हित से जोड़कर देख रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है।