रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद भी धर्मांतरण को लेकर विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला सुकमा जिले के सदरपाल गांव का है, जहां एक प्रार्थना सभा के दौरान हिंसक झड़प हो गई। घटना में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ लोगों को गंभीर चोटें आई हैं।
जानकारी के मुताबिक 31 मई को गांव के एक मकान में ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभा चल रही थी। इसी दौरान ग्रामीणों को अवैध धर्मांतरण की आशंका हुई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
लाठी-डंडों से हमला, कई घायल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि ग्रामीणों ने सभा में मौजूद लोगों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में कई लोगों के सिर फूट गए और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।
चार ग्रामीणों के खिलाफ शिकायत
मामले में चार ग्रामीणों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ संयुक्त मसीह समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। संगठन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
सुकमा की इस घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब धर्मांतरण को लेकर कानून मौजूद है और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, तो फिर लोगों द्वारा कानून हाथ में लेने की नौबत क्यों आ रही है।
धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू होने के बावजूद इस तरह की हिंसक घटनाएं सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
सियासत भी हुई तेज
घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि धर्मांतरण से जुड़े मामलों में सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है।
वहीं विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू होने के बाद भी ऐसी घटनाएं होना प्रदेश में कानून व्यवस्था की कमजोर स्थिति को दर्शाता है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।