रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर “टिफिन पॉलिटिक्स” चर्चा में है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इसे बड़े संगठनात्मक अभियान के रूप में आगे बढ़ा रही है। इसकी शुरुआत खुद मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने की है, जिससे इस पहल को खास राजनीतिक महत्व मिल गया है।
सीएम साय ने की पहल, बूथ तक पहुंचने की रणनीति
बीजेपी ने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने के लिए “टिफिन बैठक” का नया फॉर्मूला अपनाया है। पार्टी की योजना है कि राज्य के सभी शक्ति केंद्रों पर कार्यकर्ताओं के साथ ऐसी बैठकें आयोजित की जाएं। इन बैठकों में नेता और कार्यकर्ता एक साथ बैठकर भोजन करेंगे और संगठनात्मक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करेंगे।
आत्मीयता और संवाद बढ़ाने पर जोर
पार्टी इसे सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच दूरी कम करने और समन्वय बढ़ाने का माध्यम बता रही है। बीजेपी का मानना है कि अनौपचारिक माहौल में संवाद ज्यादा प्रभावी होता है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता अधिक सक्रिय और जुड़ा हुआ महसूस करता है।
“शक्ति केंद्र” पर फोकस, चुनावी तैयारी तेज
राजनीतिक रणनीति के तहत “शक्ति केंद्र” को संगठन की रीढ़ माना जाता है। टिफिन बैठकों के जरिए बीजेपी इन केंद्रों को मजबूत कर चुनावी मैनेजमेंट को धार देने की कोशिश कर रही है।
साथ ही, पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधे फीडबैक लेकर स्थानीय मुद्दों को समझने की रणनीति पर काम कर रही है।
पहले भी आजमाया जा चुका है फॉर्मूला
बीजेपी पहले भी टिफिन बैठकों का आयोजन कर चुकी है। पार्टी का दावा है कि इस तरह की पहल से संगठन में आत्मीयता और सहभागिता बढ़ती है। इस मॉडल की शुरुआत प्रधानमंत्री Narendra Modi के दौर में हुई थी, जिसे अब राज्य स्तर पर फिर से सक्रिय किया जा रहा है।
कांग्रेस का तंज, बताया बेअसर
वहीं विपक्ष इस अभियान पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कहना है कि बीजेपी पहले भी टिफिन बैठक कर चुकी है, लेकिन इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि नेताओं को जनता के बीच जाकर सीधे संवाद करना चाहिए।