कोलकाता डेस्क: मेडिकल इमरजेंसी कभी भी और कहीं भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में घर पर मौजूद कुछ बेसिक मेडिकल डिवाइस मरीज की स्थिति को शुरुआती तौर पर समझने और डॉक्टर तक जरूरी जानकारी पहुंचाने में मदद कर सकती हैं। खासकर गांव या दूरदराज के इलाकों में, जहां अस्पताल पहुंचने में समय लग सकता है, इन उपकरणों की उपयोगिता और बढ़ जाती है। हालांकि, इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और सही तरीके से करना जरूरी है।
BP मॉनिटर
घर में सबसे उपयोगी मेडिकल डिवाइस में से एक ऑटोमैटिक अपर-आर्म ब्लड प्रेशर मॉनिटर हो सकता है। यह सिस्टोलिक यानी ऊपरी और डायस्टोलिक यानी निचले ब्लड प्रेशर के साथ पल्स रेट की जानकारी देता है। आमतौर पर करीब 120/80 mmHg का ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर के आसपास माना जाता है। अगर बार-बार 130/80 mmHg या इससे ज्यादा रीडिंग आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही रीडिंग के लिए जांच से पहले करीब 5 मिनट तक शांत बैठना चाहिए। इसके बाद लगभग एक मिनट के अंतर पर दो रीडिंग लेना बेहतर माना जाता है। अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर या दूसरी परेशानी के दौरान BP की रीडिंग डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद कर सकती है। हालांकि, केवल एक रीडिंग के आधार पर खुद से दवा लेना या बदलना उचित नहीं है।
ग्लूकोमीटर
अगर परिवार में किसी व्यक्ति को डायबिटीज है, तो घर में ग्लूकोमीटर रखना काफी उपयोगी हो सकता है। खासकर इंसुलिन या ऐसी दवाएं लेने वाले मरीजों के लिए यह उपकरण महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनसे ब्लड शुगर कम होने का खतरा रहता है। ग्लूकोमीटर की मदद से कुछ ही सेकेंड में ब्लड ग्लूकोज की रीडिंग प्राप्त की जा सकती है। 70 mg/dL से कम ब्लड शुगर को लो ब्लड शुगर यानी हाइपोग्लाइसीमिया माना जाता है। बहुत कम ब्लड शुगर की स्थिति में मरीज को कमजोरी, पसीना, कंपकंपी या भ्रम जैसी परेशानी हो सकती है। ऐसे समय में शुगर की रीडिंग डॉक्टर को मरीज की स्थिति समझने में मदद कर सकती है। डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही शुगर की जांच और दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। ग्लूकोमीटर की रीडिंग को समझना और सही तरीके से जांच करना भी उतना ही जरूरी है।
पल्स ऑक्सीमीटर
सांस लेने में परेशानी होने पर पल्स ऑक्सीमीटर घर में काफी काम आ सकता है। यह उंगली पर लगाकर खून में ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO₂ और पल्स रेट की जानकारी देता है।आमतौर पर स्वस्थ लोगों में SpO₂ का स्तर 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहता है। हालांकि, दिल या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों में सामान्य स्तर अलग हो सकता है। इसी तरह अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भी ऑक्सीजन का सामान्य स्तर अलग हो सकता है। अगर ऑक्सीजन का स्तर लगातार कम हो रहा है और साथ में सांस फूलना या अन्य लक्षण बढ़ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द मेडिकल सलाह लेना जरूरी है। पल्स ऑक्सीमीटर की रीडिंग को अकेले देखकर बीमारी का पता लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
थर्मामीटर
घर में थर्मामीटर होना भी बेसिक मेडिकल जरूरतों में शामिल किया जा सकता है। इसकी मदद से शरीर का तापमान मापकर बुखार की स्थिति का शुरुआती अंदाजा लगाया जा सकता है। बुखार के दौरान तापमान की नियमित निगरानी डॉक्टर को मरीज की स्थिति समझने में मदद कर सकती है। डिजिटल थर्मामीटर का इस्तेमाल करना आसान होता है और कुछ ही समय में तापमान की जानकारी मिल जाती है। बच्चों, बुजुर्गों और लंबे समय से बीमार लोगों के लिए तापमान पर नजर रखना खास तौर पर उपयोगी हो सकता है। अगर तेज बुखार बना रहता है या उसके साथ दूसरे गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सिर्फ तापमान देखकर खुद से एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं लेना सही नहीं है। थर्मामीटर बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि शरीर के तापमान की जानकारी देने में मदद करता है।
स्मार्टवॉच या पोर्टेबल ECG डिवाइस
दिल से जुड़ी समस्या वाले कुछ लोगों के लिए ECG फीचर वाली स्मार्टवॉच या पोर्टेबल ECG डिवाइस उपयोगी हो सकती है। इन उपकरणों की मदद से कुछ स्थितियों में हृदय की धड़कन और रिदम से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड की जा सकती है। अगर किसी व्यक्ति को धड़कन तेज होने, अनियमित धड़कन या अचानक घबराहट जैसी परेशानी महसूस होती है, तो रिकॉर्ड की गई जानकारी डॉक्टर के साथ साझा की जा सकती है। इससे डॉक्टर को मरीज के लक्षणों और रिकॉर्ड के बीच संबंध समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, स्मार्टवॉच या पोर्टेबल ECG डिवाइस अस्पताल में किए जाने वाले विस्तृत ECG और दूसरे मेडिकल टेस्ट का विकल्प नहीं हैं। हर असामान्य रीडिंग का मतलब गंभीर बीमारी होना जरूरी नहीं है। इसलिए ऐसी रीडिंग मिलने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। सीने में तेज दर्द, सांस लेने में गंभीर परेशानी या बेहोशी जैसी स्थिति में डिवाइस की रीडिंग का इंतजार नहीं करना चाहिए और तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
सही इस्तेमाल भी है जरूरी
घर में मेडिकल डिवाइस रखना तभी फायदेमंद है, जब परिवार के लोगों को उनका सही इस्तेमाल पता हो। गलत तरीके से BP, ब्लड शुगर या ऑक्सीजन की जांच करने पर गलत रीडिंग आ सकती है। इससे मरीज या परिवार के लोग अनावश्यक रूप से घबरा सकते हैं या जरूरी इलाज में देरी भी हो सकती है। इसलिए हर उपकरण के इस्तेमाल की सही प्रक्रिया समझना जरूरी है। डिवाइस की बैटरी, सेंसर और दूसरी जरूरी चीजों की भी समय-समय पर जांच करनी चाहिए। मरीज की पुरानी रीडिंग को तारीख और समय के साथ नोट करके रखना डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकता है। इन उपकरणों से मिली जानकारी डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद करती है, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।खास तौर पर गंभीर लक्षणों या मेडिकल इमरजेंसी में घरेलू उपकरणों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत अस्पताल या आपातकालीन चिकित्सा सेवा की मदद लेनी चाहिए।