नई दिल्ली: देश में एक तरफ जहां जीवनदायी दवाओं की किल्लत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और टिटनेस के टीके की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की सिफारिश और केंद्रीय मंजूरी के बाद अब देशभर में कम से कम 82 प्रकार की दवाओं के दाम बढ़ जाएंगे।
किल्लत के बीच सरकार का बड़ा फैसला
दरअसल, देश के विभिन्न अस्पतालों और कैंसर केंद्रों में इस समय जीवनदायी दवाओं की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसके कारण मरीजों का इलाज, विशेषकर कीमोथेरेपी, बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस गंभीर स्थिति के बीच सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ किया है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले के बाद, जिनके पास पैसा है वे कम से कम महंगी कीमत पर ही सही, लेकिन बेहतर इलाज हासिल कर सकेंगे।
इन कैंसर दवाओं पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
सप्लाई चेन में आई रुकावट के कारण फेफड़े (Lung), ओवरी, सर्विक्स, सिर और गर्दन (Head & Neck), ब्लैडर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सिसप्लेटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लेटिन (Carboplatin) ग्रुप की दवाओं की भारी डिमांड है, लेकिन बाजार में इनकी उपलब्धता बेहद कम है।
बड़ी बात: सरकार की ओर से भले ही मुख्य रूप से केवल चार दवाओं के मूल्य निर्धारण में बदलाव को मंजूरी दी गई हो, लेकिन इसका असर 27 अलग-अलग इलाजों में इस्तेमाल होने वाले लगभग 1,000 फॉर्मूला दवाओं पर पड़ेगा।
आम जनता की जेब पर दोहरी मार
आमतौर पर सरकार हर साल दवाओं की कीमतें तय करती है। लेकिन मौजूदा समय में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे युद्ध और वैश्विक हालातों के कारण लगभग हर जरूरी चीज के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं। ऐसे में जीवनदायी और आवश्यक दवाओं की कीमतों में इस तरह की वृद्धि से मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए कैंसर जैसी घातक बीमारी का इलाज कराना और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।