मनुष्य जीवन का मूल्य तभी समझ पाता है, जब समय की वास्तविकता उसके भीतर जागती है। जिस क्षण व्यक्ति समय की उपयोगिता को पहचान लेता है और जागरूकता के साथ उसका सदुपयोग करने लगता है, उसी क्षण से वह वास्तविक जीवन जीना प्रारंभ करता है। अन्यथा समय की अनदेखी करने वाले लोग अपनी ही क्षमता, भविष्य और संभावनाओं का ह्रास करते हुए अनजाने में स्वयं को खोते जाते हैं। यह स्थिति वैसी ही है जैसे बहुमूल्य रत्नों को फटी थैली में भरकर चलना, जहाँ रास्ते में सबकुछ झर जाता है और अंत में हाथ खाली रह जाते हैं।
समय का क्षरण ही जीवन का क्षरण
जीवन कोई अविनाशी निधि नहीं, बल्कि क्षण-क्षण घटती हुई पूंजी है। हर सांस के साथ हमारा जीवन-कोष थोड़ा और कम हो जाता है। इसे न हम देख पाते हैं, न मानना चाहते हैं, पर सत्य यही है कि पानी की बूंद-बूंद से घड़ा खाली होता है, और जीवन भी हर क्षण के साथ थकता और टूटता चला जाता है। आयु बढ़ने का अर्थ जीवन बढ़ना नहीं, बल्कि मृत्यु का निकट आना है—यह कड़वी सच्चाई हम स्वीकारना ही नहीं चाहते।
हर कदम हमें मरण की ओर ले जाता है
यह भ्रम पालना आसान है कि हम बढ़ रहे हैं, पर वास्तविकता यह है कि हमारा हर कदम जीवन-समाप्ति की ओर अग्रसर है। जिस अमूल्य समय के सहारे महानता, समृद्धि और सफलता जैसी ऊँचाइयाँ हासिल की जा सकती हैं, वही समय हमारी उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे व्यर्थ होता जाता है। व्यक्ति को इस बात की फुर्सत ही नहीं होती कि वह देख सके कि उसकी जीवन-रत्नों की थैली कब, कैसे और किस तरह खाली होती जा रही है।
समय का सदुपयोग: महानता का एकमात्र सोपान
जब समय के सदुपयोग और दुरुपयोग की तुलना की जाती है, तो स्पष्ट दिखाई देता है कि इन दोनों के बीच का छोटा-सा अंतर भविष्य में कितना विशाल परिणाम देता है। समय ही जीवन है, समय ही उत्कर्ष है, समय ही महानता की सीढ़ी है। जिसने महाकाल को पहचाना, उसके साथ चलना सीखा, वही मृत्युंजयी बना। लेकिन जो समय को चुनौती देने, उसे अनदेखा करने या उसके साथ खिलवाड़ करने की भूल करते हैं, वे अपने ही भाग्य के द्वार बंद कर देते हैं।
समय की अनदेखी सबसे बड़ा अपराध
समय का दुरुपयोग करना सिंह के दांत गिनने जैसी मूर्खता है। यह अपने ही भविष्य को ठुकराने जैसा है। जो समय को गंवाते हैं, वे अपने सुख, सफलता और आनंद के मार्ग स्वयं अवरुद्ध करते हैं। इसके विपरीत, जो जागरूक लोग जीवन की पूंजी का आदर करते हैं, वे अपने हर क्षण को सार्थक बनाते हुए आगे बढ़ते हैं। उनके दिन की हर घड़ी योजनाबद्ध होती है और वे एक भी घड़ी व्यर्थ नहीं गंवाते। क्योंकि वे जानते हैं कि प्रमाद का श्मशान उन लोगों को ही जलाता है, जो अपने समय को अर्थहीन बना देते हैं।
अस्तित्व या अंत—निर्णय आपके हाथ में है
जीवन और समय का यह संबंध स्पष्ट करता है कि हमारा अस्तित्व हर पल समाप्त होने की ओर है। परंतु यही क्षण अगर जागरूकता, अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण क्रिया से भरा हो, तो यही अस्तित्व असाधारण बन जाता है। अन्यथा समय की अनदेखी व्यक्ति को जीवित होते हुए भी जीवनहीन बना देती है—एक ऐसा अस्तित्व जो सिर्फ बीतता है, जीता नहीं।
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