गाजा में इसराइली हमले पर अमेरिका के रुख़ को लेकर अरब और इस्लामिक देशों की नाराज़गी लगातार क्यों बढ़ती जा रही है
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की ओर से अनुच्छेद 99 लागू करने के बाद शुक्रवार को यूएन सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक हुई थी.
अनुच्छेद 99 लागू होने के बाद ग़ज़ा में जारी इसराइली सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए सुरक्षा परिषद को वोटिंग के लिए मजबूर होना पड़ा.
संयुक्त अरब अमीरात ने यूएन सुरक्षा परिषद में युद्धविराम को लेकर प्रस्ताव रखा और इस पर वोटिंग हुई. इस प्रस्ताव पर सुरक्षा परिषद के 13 सदस्यों ने पक्ष में वोट किया लेकिन अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया.
इस्लामिक देशों में निराशा
विवादित फ़लस्तीनी क्षेत्र में सैन्य और मानवीय संकट उभरने पर अरब देश और ईरान 1950 के दशक से ही पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ 'तेल को हथियार' के रूप में इस्तेमाल करने पर चर्चा करते रहे हैं.
उन्होंने दो बार तेल की आपूर्ति रोकी भी थी. पहले 1967 में छह दिनों की जंग के दौरान और फिर 1973 में योम किपुर की लड़ाई के दौरान. पहले वाली रोक असरदार नहीं रही थी, मगर दूसरी रोक के काफ़ी गहरे असर देखने को मिले थे.
पश्चिम और अरब देशों ने इन घटनाओं से अपने-अपने सबक लिए. इसलिए, अब कोई भी तेल की आपूर्ति रोकने के बारे में बात नहीं करता और न ही किसी की ऐसा करने की मंशा है.
50 साल पहले इसराइल को लगता था कि कोई उस पर हमला नहीं करेगा और इसी तरह अमेरिका को लगता था कि अरब देश तेल की आपूर्ति नहीं रोकेंगे. मगर ये दोनों बातें हुईं.
क़तर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ अरब देशों के विदेश मंत्रियों से समूह ने कहा कि अमेरिका को इसराइल के मामले में व्यापक भूमिका निभानी चाहिए.
सऊदी अरब भी खिन्न , संकट सुलझाने में रहा नाकामयाब
वहीं सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में कहा था, ''हम जिस प्रभाव का इस्तेमाल कर सकते थे, वो नाकाम हो गया है क्योंकि इसके इस्तेमाल से परहेज़ कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने के पर्याप्त मौक़े थे. अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए ज़रूरी है कि वैश्विक संगठन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें. हम एक ऐसी स्थिति देख रहे हैं, जिसमें युद्धविराम कोई गंदा शब्द बना गया है. सच कहिए तो हम इसे समझने में नाकाम रहे हैं.''
अमेरिका के वीटो को लेकर ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसइदी ने तो बहुत ही कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया.
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