ईरान के चाबहार पोर्ट से भारत के दूरी बनाने से जुड़ी ख़बरों पर विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस विषय पर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है और किसी तरह के एकतरफा फैसले की बात सही नहीं है।
अमेरिका से मिली प्रतिबंध छूट का जिक्र
रणधीर जायसवाल ने बताया कि 28 अक्तूबर 2025 को अमेरिका के ट्रेज़री विभाग ने भारत को एक पत्र जारी किया था, जिसमें बिना शर्त प्रतिबंधों में छूट की जानकारी दी गई थी। यह छूट 26 अप्रैल 2026 तक वैध है। उन्होंने कहा कि भारत इसी व्यवस्था के तहत चाबहार से जुड़े मामलों पर अमेरिका के साथ संवाद कर रहा है।
रिपोर्ट के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
दरअसल, इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि भारत ईरान के चाबहार पोर्ट से धीरे-धीरे दूरी बना रहा है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर अमेरिका के सामने झुकने और राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
भारत-ईरान की साझा परियोजना है चाबहार पोर्ट
ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान की साझा परियोजना है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देना और भारत को मध्य एशिया तथा अफगानिस्तान तक वैकल्पिक व्यापार मार्ग उपलब्ध कराना है। भारत पिछले लगभग एक दशक से इस परियोजना से जुड़ा रहा है।
अमेरिकी प्रतिबंध और बढ़ी चिंताए
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जनवरी को बयान दिया था कि जो भी देश ईरान के साथ कारोबार करेगा, उस पर अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इसके अलावा अमेरिका ने 29 सितंबर 2025 को ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाते हुए चाबहार पोर्ट का संचालन करने वालों को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की घोषणा की थी। इन्हीं घटनाओं के बाद भारत की भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
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