मनीला - फिलीपींस की राजधानी मनीला में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों, सीमा पर शांति, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान वांग यी ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर सकारात्मक संदेश देते हुए कहा कि भारत और चीन को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
'एक-दूसरे के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं'
चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को "प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार" और "खतरा नहीं, बल्कि अवसर" के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकातों का किया जिक्र
वांग यी ने कहा कि कजान और तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकातों ने भारत-चीन संबंधों को सुधारने और उन्हें नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है। उनके अनुसार इन बैठकों के बाद दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत हुई है और द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है।
सीमा पर शांति और व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि
चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच संस्थागत स्तर पर संवाद फिर से शुरू हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है, जबकि द्विपक्षीय व्यापार भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वांग यी ने कहा कि इन उपलब्धियों को बनाए रखना दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है।
ग्लोबल साउथ और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर
वांग यी ने भारत और चीन को उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा ग्लोबल साउथ के प्रमुख प्रतिनिधि देशों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने नागरिकों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही व्यापार, निवेश, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद को लेकर तनाव देखने को मिला था। ऐसे में मनीला में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब दोनों पक्षों की कोशिश है कि सीमा पर शांति बनाए रखते हुए आर्थिक, व्यापारिक और बहुपक्षीय सहयोग को नई गति दी जाए।