कई वर्षों से कनाडा खालिस्तानी तत्वों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकानों में गिना जाता रहा है। लेकिन हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कनाडा की एनएसए नथाली ड्रौइन के बीच हुई दो दिवसीय रणनीतिक वार्ता ने पूरा परिदृश्य बदल दिया। इस मुलाकात ने न केवल भारत-कनाडा संबंधों में नई ऊर्जा का संचार किया, बल्कि कनाडा की सुरक्षा नीति में भी बड़ा बदलाव दर्ज किया। दोनों देशों ने यह स्वीकार किया कि भारत-विरोधी गतिविधियों को अब किसी राजनीतिक स्वरूप में नहीं देखा जाएगा।
खालिस्तानी गतिविधियों पर अब ‘फ्री स्पीच’ का बहाना खत्म
अब तक कनाडा सरकार खालिस्तानी समूहों की हिंसक गतिविधियों को अभिव्यक्ति की आज़ादी का संरक्षण देती रही। लेकिन डोभाल ने कनाडा के सामने ऐसे ठोस प्रमाण और खुफिया इनपुट रखे, जिन्होंने ओटावा को अपनी नीति पूरी तरह बदलने पर मजबूर कर दिया। कनाडा ने माना कि ये समूह किसी भी रूप में राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि संगठित अपराध का हिस्सा हैं। अब इन पर वही कार्रवाई होगी जो किसी गैंगस्टर, ड्रग माफिया या क्रिमिनल नेटवर्क पर की जाती है। यह बदलाव खालिस्तान समर्थक लॉबी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग से घिरेंगे चरमपंथी
बैठक में यह तय हुआ कि दोनों देश आतंकवाद, साइबर खतरे और नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़े मामलों में रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करेंगे। खासकर खालिस्तान समर्थक संगठनों से जुड़े नेटवर्क निगरानी के मुख्य दायरे में होंगे। इस समझौते के बाद कनाडा में सक्रिय भारत-विरोधी तत्व खुद को पूरी तरह एक्सपोज़ होता महसूस करेंगे, क्योंकि उनकी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत भारत के पास पहुंच जाएगी।
कनाडा ने पहली बार माना—खालिस्तानी नेटवर्क मौजूद हैं
यह वार्ता भारत-कनाडा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। अब तक कनाडा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करने से बचता रहा था कि उसकी धरती पर खालिस्तानी आतंक से जुड़े समूह सक्रिय हैं। लेकिन इस बैठक के बाद ओटावा ने पहली बार यह माना कि ऐसे हिंसक समूह न केवल मौजूद हैं बल्कि इन पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। यह बदलाव भारत की कूटनीति की बड़ी उपलब्धि है, जिसे कई वर्षों से लगातार प्रयासों के बाद हासिल किया गया है।
भविष्य की कार्रवाई का संकेत: ‘नो एंट्री’ बोर्ड का संदेश
डोभाल और ड्रौइन की मुलाकात को विशेषज्ञ एक तरह की 'कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक' बता रहे हैं। कनाडा ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी जमीन अब खालिस्तानी नेटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहेगी। भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि की योजना बनेगी तो उसका जवाब कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई और भारत को तत्काल जानकारी के रूप में सामने आएगा। यह संकेत है कि अब खालिस्तानी विचारधारा का हिंसक ढांचा वैश्विक स्तर पर कमजोर होने वाला है।
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