उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में महिलाओं द्वारा एक-दूसरे को हल्दी लगाकर नाच-गान करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के पुजारियों ने इसे सनातन परंपराओं के विरुद्ध बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। यह गतिविधि महाशिवरात्रि से पहले चल रही महा शिवनवरात्रि के दौरान सामने आई है।
शिवनवरात्रि में विशेष पूजा और श्रृंगार की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाने से पहले शिवनवरात्रि के नौ दिनों तक प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान सुबह मंदिर परिसर में कोटेश्वर भगवान का विधिवत पूजन-अर्चन होता है।
पूजा के बाद महिलाओं का नृत्य-गान
पूजन के पश्चात दर्शन के लिए आने वाली करीब 50 से 100 महिलाएं भगवान शिव के विवाह उत्सव के रूप में भजन मंडली के साथ नाच-गान करती हैं और एक-दूसरे को हल्दी लगाकर उत्सव मनाती हैं।
पुजारियों की आपत्ति: परंपरा के खिलाफ बताया
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिवनवरात्रि केवल पूजा, आराधना और संकल्प का पर्व है, जिसकी शुरुआत पंचमी तिथि से होती है। इसे भगवान शिव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, न कि विवाह उत्सव के रूप में।
शास्त्रों में हल्दी खेलने का उल्लेख नहीं
पुजारी महेश शर्मा के अनुसार शिव पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में शिवरात्रि को शिव विवाह या हल्दी खेलने के रूप में मनाने का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने इसे परंपरा के नाम पर मजाक करार देते हुए मंदिर समिति से इस पर समय रहते प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
मंदिर प्रशासन को मिली शिकायतें
मंदिर प्रशासन को भी मंदिर परिसर में हल्दी खेलने को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसके बाद प्रशासक ने संकेत दिए हैं कि इस गतिविधि पर रोक लगाने के लिए जल्द ही आदेश जारी किए जा सकते हैं।
कोटेश्वर भगवान को उबटन अर्पित करने की परंपरा
मंदिर परिसर में कोटेश्वर भगवान को उबटन अर्पित करने की परंपरा पहले से चली आ रही है। नौ दिनों तक भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार होता है और महाशिवरात्रि पर उन्हें दूल्हे के रूप में सजाकर सेहरा अर्पित किया जाता है।
11 साल पहले शुरू हुई हल्दी खेलने की परंपरा
बताया जा रहा है कि महाकाल मंदिर में नियमित दर्शन के लिए आने वाली महिलाओं ने करीब 11 साल पहले हल्दी खेलने की परंपरा शुरू की थी। ढोल की थाप पर नाचते हुए महिलाएं एक-दूसरे को हल्दी लगाकर उत्सव मनाने लगीं, जो अब विवाद का विषय बन गया है।
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