लखनऊ: उत्तरप्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। गुरुवार को पूर्वांचल के गोरखपुर, जौनपुर, आजमगढ़ समेत 8 जिलों में बारिश का दौर जारी है। जौनपुर में तेज बारिश के बाद सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि गोरखपुर की कई सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। जलभराव के कारण कई बाइक बीच रास्ते में बंद हो गईं और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग ने प्रदेश के 48 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। वहीं, पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर यूपी की नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। गंगा, यमुना और शारदा समेत करीब 10 नदियां उफान पर हैं और 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं।
गोरखपुर में सड़कों पर भरा एक फीट पानी
गोरखपुर में गुरुवार को हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई प्रमुख सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार थम गई।जलभराव के कारण कई बाइक पानी में फंसकर बंद हो गईं। लोगों को पानी के बीच से अपने वाहन निकालते हुए देखा गया। बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की भी परीक्षा ले ली।
जौनपुर में सड़कें बनीं तालाब
जौनपुर में बारिश इतनी तेज हुई कि कई सड़कें पानी से लबालब हो गईं। सड़कों पर जलभराव के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई।कई जगह वाहन पानी में फंसे नजर आए। स्थानीय लोगों को बारिश के पानी के बीच से गुजरना पड़ा। लगातार बारिश होने से जलभराव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
48 जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तरप्रदेश के 48 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।मौसम विभाग के अलर्ट के बाद प्रशासन को भी सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से जलभराव या बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बारिश और बढ़ते जलस्तर से मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
यूपी की 10 नदियां उफान पर
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश का असर उत्तरप्रदेश की नदियों में दिखाई दे रहा है। गंगा, यमुना और शारदा समेत करीब 10 नदियां उफान पर हैं।नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। राज्य में 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में फर्रुखाबाद शामिल है, जहां 49 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है।
काशी में घाटों की सीढ़ियों तक पहुंचा पानी
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर भी स्थिति गंभीर होती जा रही है। पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच गया है और 100 से ज्यादा छोटे मंदिर जलमग्न बताए जा रहे हैं। गंगा का बढ़ता पानी घाटों के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर रहा है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कानपुर में गंगा चेतावनी बिंदु के करीब
कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है। नदी के आसपास के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है।बताया जा रहा है कि 5 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। कई जगह बच्चों को नाव के जरिए स्कूल जाना पड़ रहा है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गई है।
उन्नाव की कॉलोनियों में घुसा गंगा का पानी
उन्नाव में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। नदी का पानी कई कॉलोनियों में पहुंच गया है। कई परिवारों को अपने घरों की छतों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।जलभराव के कारण गलियों में नावें चल रही हैं। स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।लखीमपुर-खीरी में शारदा नदी भी उफान पर है। नदी के कटाव के कारण अब तक करीब 70 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है।तेज बहाव और लगातार हो रहे कटाव से नदी किनारे रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की निगरानी के बावजूद ग्रामीणों को अपने घर और खेतों की सुरक्षा को लेकर डर बना हुआ है।
पूर्वांचल से लेकर काशी तक बारिश का असर
पूर्वांचल में बारिश के कारण जहां शहरों में जलभराव की समस्या सामने आई है, वहीं नदियों का बढ़ता जलस्तर ग्रामीण इलाकों के लिए बाढ़ का खतरा बढ़ा रहा है। गोरखपुर और जौनपुर में सड़कें जलमग्न हैं, जबकि वाराणसी में घाटों पर पानी पहुंच चुका है।मौसम विभाग के 48 जिलों में बारिश के अलर्ट के बीच आने वाले घंटों में स्थिति पर नजर बनी हुई है। भारी बारिश वाले जिलों में प्रशासन और स्थानीय लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।