नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को विपक्ष के लगातार विरोध, नारेबाजी और हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसदीय कामकाज को लेकर आंकड़े साझा किए और विपक्ष पर सदन में चर्चा से बचने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि विधायी कामकाज के लिहाज से मानसून सत्र को पूरी तरह असफल नहीं कहा जा सकता, क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा से कुल 12 विधेयक पारित हुए। हालांकि, सदनों में बहस और चर्चा के लिए निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा लगातार व्यवधान के कारण इस्तेमाल नहीं हो सका।
लोकसभा में 19%, राज्यसभा में 39% उत्पादकता
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, विपक्ष के लगातार विरोध और सदन में व्यवधान के कारण लोकसभा की उत्पादकता केवल 19 प्रतिशत रही, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 39 प्रतिशत दर्ज किया गया। रिजिजू ने कहा कि लंबे संसदीय अनुभव के बावजूद उन्होंने ऐसी स्थिति कम ही देखी है, जिसमें विपक्ष ही चर्चा में हिस्सा लेने से पीछे हटता नजर आए। उनके मुताबिक, विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और वॉकआउट के बावजूद सत्तारूढ़ एनडीए के सांसदों के साथ कुछ विपक्षी सदस्यों ने विधायी कार्यवाही में भाग लिया। मंत्री ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी होती है कि वे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में चर्चा करें। लेकिन इस सत्र में बार-बार होने वाले व्यवधान ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया।
12 विधेयक हुए पारित
मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों से कुल 12 विधेयक पारित किए गए। रिजिजू ने इसे विधायी कामकाज की दृष्टि से सत्र की उपलब्धि बताया। हालांकि, विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग करता रहा और कई मौकों पर सदन की कार्यवाही बाधित हुई। इसके चलते सरकार और विपक्ष के बीच टकराव पूरे सत्र के दौरान दिखाई दिया।
पेपर लीक रोकने वाले बिल पर हुई चर्चा
रिजिजू ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़े ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक’ पर दोनों सदनों में विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के साथ पूरी तरह चर्चा जिस एक विधेयक पर हो सकी, वह यही विधेयक था। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकना और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है।
मकर द्वार पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
संसद का अंतिम दिन भी राजनीतिक गतिविधियों से अछूता नहीं रहा। सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद संसद परिसर के मकर द्वार पर भाजपा और विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसद आमने-सामने नजर आए। दोनों पक्षों की ओर से विरोध-प्रदर्शन और जवाबी नारेबाजी हुई। इससे संसद परिसर में भी राजनीतिक माहौल गरम रहा।
हंगामे के बीच खत्म हुआ मानसून सत्र
पूरे मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने कई विषयों पर चर्चा की मांग की, जबकि सरकार की ओर से विधायी कामकाज आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। सत्र के समापन पर सामने आए उत्पादकता के आंकड़ों ने एक बार फिर संसद में होने वाले व्यवधान और उसके कारण होने वाले कामकाज के नुकसान को लेकर बहस छेड़ दी है। रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, भविष्य के सत्रों में सदन की कार्यवाही को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए सभी दलों को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।